क्या आपको भी बरसात में बार-बार जकड़ लेता है सर्दी-जुकाम, हो सकती हैं ये 4 वजह

Monsoon viral infection causes: आसमान में काले बादल छाने और बारिश की फुहारों के शुरू होते ही जहां एक तरफ चिलचिलाती गर्मी से राहत मिलती है, वहीं दूसरी तरफ अस्पतालों में मरीजों की कतारें भी लंबी होने लगती हैं।

मानसून की शुरुआत होते ही घर के बड़े-बुजुर्ग अक्सर हमें बारिश में भीगने से बचने और सेहत का खास ख्याल रखने की हिदायत देने लगते हैं। इस मौसम में ज्यादातर लोग सर्दी, खांसी, जुकाम और मौसमी बुखार (Viral Fever) की चपेट में आ जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या वाकई केवल पानी में भीगना ही इस बीमारी की वजह है? विज्ञान की नजर से देखें तो इसके पीछे मौसम में आने वाले कई बड़े बदलाव और शारीरिक प्रक्रियाएं जिम्मेदार हैं। आइए जानते हैं मानसून में बार-बार बीमार पड़ने के असली वैज्ञानिक कारण और इससे बचने के उपाय।

1. हवा में नमी और वायरस-बैक्टीरिया का चौतरफा हमला

बारिश के मौसम में सर्दी-जुकाम होने का सबसे प्राथमिक और मुख्य कारण है वातावरण में वायरस का अचानक बेहद सक्रिय हो जाना।

  • अनुकूल वातावरण: मानसून के दौरान हवा में आर्द्रता यानी नमी (Humidity) का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यह उच्च नमी वाला वातावरण राइनोवायरस (Rhinovirus) और अन्य रेस्पिरेटरी वायरसों के पनपने और फैलने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।

  • तेजी से प्रसार: इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस हवा में मौजूद पानी की छोटी बूंदों के सहारे बहुत तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रैवल करते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

2. अचानक तापमान में गिरावट और इम्युनिटी पर दबाव

जब आप अचानक तेज बारिश में भीग जाते हैं या ठंडी हवाओं के संपर्क में आते हैं, तो आपके शरीर का बाहरी तापमान तेजी से गिरने लगता है।

  • ऊर्जा का भटकाव: ऐसी स्थिति में हमारा शरीर अपनी पूरी ऊर्जा (Energy) को गिरते हुए तापमान को दोबारा सामान्य और नियंत्रित करने में लगा देता है।

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: शरीर का पूरा ध्यान होमियोस्टैसिस (तापमान संतुलन) पर केंद्रित होने के कारण, हमारी अंदरूनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity System) अस्थाई रूप से कमजोर पड़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर हवा में मौजूद हानिकारक वायरस हमारे शरीर पर आसानी से हावी हो जाते हैं।

3. नाक की सुरक्षात्मक म्यूकस झिल्ली का सूखना

ठंडी और शुष्क हवाओं के चलने से हमारे श्वसन तंत्र (Respiratory System) की पहली सुरक्षा पंक्ति प्रभावित होती है। हमारी नाक के अंदरूनी रास्ते में एक पतली म्यूकस झिल्ली (Mucus Membrane) होती है, जो प्राकृतिक रूप से बाहर से आने वाले धूल-कणों और वायरसों को फेफड़ों तक जाने से रोकती है। लेकिन बारिश की ठंडी हवाओं के संपर्क में आने से यह झिल्ली सूख जाती है। जैसे ही यह सुरक्षा कवच सूखता है, हवा के जरिए आ रहे वायरस बिना किसी रुकावट के श्वसन नली के जरिए शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं।

4. बंद और कम हवादार जगहों पर ज्यादा वक्त बिताना

बारिश के दौरान लोग अक्सर भीगने से बचने के लिए घरों, दफ्तरों या दुकानों के बंद और कम हवादार (Unventilated) कमरों में एक साथ इकट्ठा रहते हैं। बंद जगहों पर एयर सर्कुलेशन ठीक से न होने के कारण यदि वहां कोई एक भी संक्रमित व्यक्ति मौजूद है, तो उसके खांसने या छींकने से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स हवा में लंबे समय तक तैरते रहते हैं। इससे कमरे में मौजूद दूसरे स्वस्थ व्यक्तियों में क्रॉस-इन्फेक्शन के जरिए वायरस बहुत आसानी से ट्रांसफर हो जाता है।

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मानसून में सर्दी-जुकाम से बचने के 2 अचूक और आसान उपाय

अगर आप इस बारिश के मौसम में बिना बीमार पड़े प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं, तो अपनी दिनचर्या में इन दो आदतों को अनिवार्य रूप से शामिल करें:

  • खुद को पूरी तरह हाइड्रेटेड रखें: बारिश के दिनों में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी, हर्बल सूप, काढ़ा या ग्रीन टी का सेवन करें। लिक्विड डाइट से नाक और गले के रास्ते हमेशा नम बने रहते हैं, जिससे वायरस को चिपकने का मौका नहीं मिलता।

  • पर्सनल हाइजीन और हाथों की सफाई: घर लौटने पर या कुछ भी खाने से पहले अपने हाथों को साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं। इसके अलावा, बिना हाथ धोए अपने चेहरे, विशेषकर आंखों, होंठों और नाक को छूने (T-Zone) से हमेशा बचें, क्योंकि यही हिस्से वायरस के प्रवेश के मुख्य द्वार होते हैं।

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