इन जातकों की चमकेगी किस्मत; जून में खत्म हो रहा है 7 साल का ‘शनि काल’, जानें क्या होगा बदलाव

ज्योतिष में शनि को सबसे प्रभावशाली ग्रहों में गिना जाता है। मान्यता है कि यह ग्रह व्यक्ति के कर्मों के अनुसार परिणाम देता है। जब किसी राशि पर शनि की साढ़े साती शुरू होने की चर्चा होती है तो कई लोग भविष्य को लेकर चिंतित हो जाते हैं। हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह समय केवल कठिनाइयों का नहीं बल्कि आत्ममंथन और कर्मों के मूल्यांकन का भी माना जाता है।
क्या होती है साढ़े साती?
शनि नवग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। यह लगभग ढाई वर्ष तक एक राशि में रहता है। साढ़े साती का संबंध जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति और शनि के गोचर से जुड़ा होता है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह चरण तब शुरू होता है जब शनि चंद्रमा से लगभग 45 डिग्री पीछे पहुंचता है। यह अवधि तब समाप्त मानी जाती है जब शनि चंद्रमा से 45 डिग्री आगे निकल जाता है। इसी वजह से इसका कुल प्रभाव करीब साढ़े सात वर्षों तक माना जाता है।
इस समय किन राशियों पर है प्रभाव?
वर्तमान में शनि मीन राशि में स्थित हैं। मीन राशि के स्वामी बृहस्पति माने जाते हैं। शनि के मीन राशि में रहने के कारण अभी कुंभ, मीन और मेष राशि के जातकों पर साढ़े साती का प्रभाव बताया जाता है।
शनि ने मार्च 2025 में मीन राशि में प्रवेश किया था। ज्योतिषीय मान्यता है कि इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है और व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुरूप फल प्राप्त होते हैं।
जून 2027 तक रहेगा यह चरण
शनि जून 2027 तक मीन राशि में रहने वाले हैं। इसके बाद शनि मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसी बदलाव के साथ कुंभ राशि के जातकों के लिए साढ़े साती का दौर समाप्त हो जाएगा।
कुंभ राशि के लिए यह चरण जनवरी 2020 में शुरू हुआ था जब शनि मकर राशि में थे। वर्ष 2023 में शनि कुंभ राशि में पहुंचे और वर्तमान में मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। जून 2027 में मेष राशि में प्रवेश के साथ कुंभ राशि को इस लंबे दौर से राहत मिल जाएगी।
कुंभ राशि वालों के लिए क्यों खास है यह समय?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार एक बार साढ़े साती समाप्त होने के बाद उसका प्रभाव लगभग 30 वर्षों तक दोबारा नहीं आता। इसलिए कुंभ राशि के लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
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कहा जाता है कि इस अवधि के बाद कई लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। करियर, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि इसका आधार व्यक्ति के कर्म और परिस्थितियां ही मानी जाती हैं।


