यमराज के ‘एजेंट’ बनी यूपी पुलिस: 2025 में हर महीने 4 बदमाश भेजे गए ऊपर, डीजीपी ने जारी किए खौफनाक आंकड़े

शातिर अपराधियों के लिए उत्तर प्रदेश अब ‘उत्तम प्रदेश’ नहीं रह गया है। पहले जनता में अपराधियों का खौफ रहता था। आज अपराधियों में पुलिस की दहशत साफ देखने को मिलती है। पिछले आठ साल में हालात काफी बदल गए हैं। पहले सत्ता पक्ष को अक्सर खराब कानून व्यवस्था के मुद्दे पर घेर लिया जाता था, बदमाशों को खादी और खाकी का खुला संरक्षण मिलने की तोहमत लगती थी, न्याय की खातिर सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन होते थे, लखनऊ से दिल्ली तक यूपी को अपराधों की राजधानी बताकर शोर-शराबा मचाया जाता था।

योगी सरकार ने अपराधों की रोकथाम के लिए जीरो टॉलरेंस की जो नीति अपना रखी है, वह वाकई असरदार साबित हो रही है। नए साल का आगाज हो चुका है। नववर्ष के आगमन से सिर्फ एक रोज पहले यूपी पुलिस के मुखिया यानी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने क्राइम कंट्रोल के जो आंकड़े सामने रखे हैं, वह सरकार के नेक इरादे और पुलिस की सख्ती के दावों को पुख्ता करते हैं। पुलिस द्वारा पेश आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल एनकाउंटर में 48 बदमाशों की मौत हुई है। औसतन प्रतिमाह चार बदमाश यमलोक भेज दिए गए।

योग राज कुल कितनी मुठभेड़ हुईं

यूपी में पिछले आठ साल से सत्ता की कमान योगी आदित्यनाथ पर है। इस अवधि में पुलिस मुठभेड़ में कुल 266 बदमाशों ने अपनी जान गंवाई है। पुलिस का दावा है कि 2025 में पुलिस एनकाउंटर में सबसे ज्यादा बदमाश मारे गए। मसलन गुजरे साल अपराधियों के सफाए का अभियान ज्यादा सफल रहा। देश के सबसे बड़े सूबे की जिम्मेदारी संभालने के बाद से योगी आदित्यनाथ का जोर अपराध नियंत्रण पर रहा है। वह आज भी अपराधी और माफिया को डंके की चोट पर चेतावनी देने से पीछे नहीं हटते हैं।

क्राइम कंट्रोल के यूपी सरकार के तौर-तरीके को विभिन्न राज्यों में अपनाया जाने लगा है। बेखौफ माफिया और अपराधियों की कमर तोड़ने की यूपी पुलिस की मुहिम का असर धरातल पर साफतौर पर नजर आता है। कोई बड़ी वारदात होने पर पुलिस के बड़े व छोटे अधिकारी अब तनाव में नहीं दिखाई देते हैं। उन्हें यह चिंता नहीं होती कि जघन्य वारदात के कारण उन्हें निलंबन, लाइन हाजिर या स्थानांतरण की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा बल्कि गंगा अब उल्टी बहती है।

जघन्य वारदात की गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस टीम पूरे उत्साह के साथ मैदान में उतरती है। विपक्ष को विरोध-प्रदर्शन का मौका मिले, इसके पहले फरार अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है। यूपी में बुलडोजर कार्रवाई भी किसी से छिपी नहीं है। वांछित अपराधियों के भव्य अवैध मकान एवं प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर कार्रवाई में देरी नहीं होती।

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दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब आदि बाहरी राज्यों के बदमाश भी आज यूपी में किसी वारदात की प्लानिंग करने से परहेज करने लगे हैं। उन्हें मालूम है कि बाबा के राज में गलत हरकत का परिणाम क्या हो सकता है?

फ्री हैंड मिलने से नतीजे भी पॉजिटिव आए

राज्य में पुलिस को प्रभावी कार्रवाई के लिए फ्री हैंड मिलने से नतीजे भी पॉजिटिव आ रहे हैं। हालांकि पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के टकराव के मामले यदा-कदा देखने को मिलते रहते हैं। सरकार में उच्च स्तर पर आपसी टकराव पैदा होने की खबरें भी सुनने को मिलती रहती हैं। इसके बावजूद सरकार की गाड़ी सरपट दौड़ रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि बदमाशों को भविष्य में भी यूपी अच्छा नहीं लगे ताकि आमजन सुरक्षित माहौल में शांतिपूर्वक जीवन यापन करता रहे। अपराधियों से निपटने में पुलिस अब शेर नहीं बल्कि सवा शेर बन चुकी है।

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