अखंड भारत की ये सीमा, तालिबान-पाकिस्तान विवाद की जड़; 132 साल बाद भी धधक रही है आग

पाकिस्तान और तालिबान के बीच हालिया विवाद ने दोनों देशों के बीच की सीमा डूरंड रेखा को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। कुछ दिन पहले, कतर द्वारा जारी एक युद्धविराम वक्तव्य ने अफ़ग़ान अधिकारियों को नाराज़ कर दिया था जब उसने डूरंड रेखा को सीमा रेखा बताया था। बाद में कतर ने अपने वक्तव्य में सुधार करते हुए उसे फिर से जारी किया।

अपने पहले बयान में कतर ने कहा था कि वह अफग़ानिस्तान और पाकिस्तान जैसे भाईचारे वाले देशों के बीच सीमा तनाव कम करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करेगा और इस क्षेत्र में स्थायी सुलह की एक ठोस नींव रखेगा।

डूरंड रेखा क्या है?

अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान सीमा 1893 में हिंदू कुश में खींची गई थी, जो अफ़ग़ानिस्तान और ब्रिटिश भारत को कबायली इलाकों से जोड़ती थी। यह 19वीं सदी में रूसी और ब्रिटिश साम्राज्यों के बीच हुए महायुद्ध की एक झलक है, जिसमें अंग्रेजों ने पूर्व में रूस के संभावित विस्तारवाद के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान को एक अवरोधक के रूप में इस्तेमाल किया था।

1893 में सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड और तत्कालीन अफ़ग़ान शासक, अमीर अब्दुर रहमान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिससे डूरंड रेखा का जन्म हुआ। द्वितीय अफ़ग़ान युद्ध की समाप्ति के दो वर्ष बाद सन् 1880 में अब्दुर रहमान राजा बने।

इस युद्ध में अंग्रेजों ने अफ़ग़ान साम्राज्य के कई हिस्सों पर कब्ज़ा कर लिया था। डूरंड के साथ उनके समझौते ने भारत के साथ “अफ़ग़ान सीमा” पर उनके और ब्रिटिश भारत के “प्रभाव क्षेत्रों” की सीमाओं को परिभाषित किया। इस सात-सूत्री समझौते ने चीनी सीमा से अफ़ग़ानिस्तान की ईरानी सीमा तक फैली 2,670 किलोमीटर लंबी रेखा को मान्यता दी।

1947 में अंग्रेजों से आज़ादी के बाद पाकिस्तान को डूरंड रेखा विरासत में मिली और इसके साथ ही पश्तूनों ने इस रेखा को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और अफग़ानिस्तान ने भी इसे मान्यता देने से इनकार कर दिया।

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इस्लामाबाद डूरंड रेखा को एक अंतर्राष्ट्रीय सीमा मानता है। अफग़ानिस्तान इससे इनकार करता है। तालिबान सहित पिछली अफ़ग़ान सरकारों ने इसे एक कृत्रिम विभाजन बताया है जो पश्तून कबायली ज़मीनों को बाँटता है और अफ़ग़ान संप्रभुता को कमज़ोर करता है।

हाल के दिनों में यह सीमा दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख स्रोत बन गई है, जहां इस्लामाबाद इस पर बाड़ लगा रहा है और अफ़ग़ान सुरक्षा बल इसके कुछ हिस्सों को तोड़ रहे हैं। अफगान इस रेखा को “औपनिवेशिक अवशेष” मानकर खारिज करता है, वहीं पाकिस्तान के लिए ये क्षेत्रीय अखंडता का मामला है।

डूरंड रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा हाल ही में की गई गोलाबारी से अफ़ग़ानिस्तान में गुस्सा भड़क उठा है। इस हमले के बाद अफ़ग़ान नागरिकों और तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों को पनाह देने की धमकी दी है। पाकिस्तान ने निरंतर अफ़ग़ानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान की सीमा में बार-बार हवाई हमले और गोलाबारी की है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।

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