बस-ट्रक की टक्कर के बाद जिंदा जले 5 मुसाफिर, आधुनिक हाईवे क्यों बनते जा रहे हैं ‘काल’

देश के आधुनिक और चमचमाते एक्सप्रेस-वे पर सफर करना अब सुरक्षित नहीं रह गया है। रफ्तार की चाहत और लापरवाही के बीच कब मौत का बुलावा आ जाए, कोई नहीं जानता। ऐसा ही एक बेहद दर्दनाक और रूह कँपा देने वाला हादसा राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर सामने आया है, जहां एक स्लीपर बस और ट्रक की भीषण टक्कर ने हंसते-खेलते परिवारों को पल भर में तबाह कर दिया। इस हादसे ने एक बार फिर देश में सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोल कर रख दी है।
आधी रात को दहला दौसा: टक्कर के बाद आग का गोला बनी बस, 5 यात्री जिंदा जले
यह भयावह हादसा राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर आधी रात के सन्नाटे में हुआ। ऋषिकेश से इंदौर जा रही एक निजी यात्री बस की टक्कर सामने से आ रहे एक भारी ट्रक से हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहनों में अचानक भीषण आग लग गई। आग ने इतनी तेजी से विकराल रूप धारण किया कि बस में सवार यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
इस अग्निकांड में पांच यात्रियों की मौके पर ही जिंदा जलकर बेहद दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल यात्रियों ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। हादसे में कुल आठ लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा करीब दो दर्जन (24 से अधिक) यात्री गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें स्थानीय और जिला अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। आधी रात का वक्त होने के कारण मौके पर राहत और बचाव कार्य भी तुरंत शुरू नहीं हो सका, जिससे जनहानि और बढ़ गई। राजस्थान सरकार ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।
हर घंटे 20 मौतें: भारत की सड़कों पर जारी है ‘शवों का सफर’
यह त्रासदी कोई इकलौती घटना नहीं है। भारत आज दुनिया के उन देशों में शुमार हो चुका है, जहां हर साल सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हर एक घंटे के भीतर 50 से अधिक सड़क हादसे हो रहे हैं। इसका सीधा और डरावना मतलब यह है कि देश की सड़कों पर हर एक घंटे में औसतन 20 नागरिक अपनी जान गंवा रहे हैं। समय के साथ बदलती लाइफस्टाइल, गाड़ियों की बढ़ती संख्या और एक्सप्रेस-वे पर रफ्तार के जुनून ने सफर को बेहद असुरक्षित बना दिया है।
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‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प में सबसे बड़ा रोड़ा हैं ये हादसे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। इस विजन के तहत देश में वर्ल्ड क्लास हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल तेजी से बिछाया जा रहा है। लेकिन बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के आधुनिक होने के बावजूद नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ये बड़े सड़क हादसे न केवल देश के भीतर परिवारों को आजीवन न मिटने वाला गम दे रहे हैं, बल्कि वैश्विक पटल पर भी भारत की छवि को गहरा धक्का पहुंचा रहे हैं। जब तक हादसों और मौतों के इन आंकड़ों में प्रभावी कमी नहीं आती, तब तक विकसित राष्ट्र का सपना अधूरा ही रहेगा।



