गाजीपुर में पुलिस की लाठियों से टूटी जिंदगी, बीजेपी कार्यकर्ता की मौत

गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र से बड़ा मामला सामने आया है। थाने में पुलिस लाठीचार्ज के दौरान घायल हुए एक बीजेपी कार्यकर्ता की मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के गांव रुकन्दीपुर समेत पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीण और बीजेपी कार्यकर्ता दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर लामबंद हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार 9 सितम्बर को गाजीपुर के नोनहरा थाने पर बीजेपी कार्यकर्ता अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना दे रहे थे। देर रात पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर थाने की लाइट बंद कर दी और अंधेरे का फायदा उठाकर बर्बर पिटाई की। इस दौरान कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। लाठीचार्ज का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें पुलिस की कार्रवाई साफ दिखाई दे रही थी।

इसी लाठीचार्ज में घायल हुए बीजेपी कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की शुक्रवार सुबह मौत हो गई। मृतक सियाराम दिव्यांग थे और लाठीचार्ज के दौरान वह भाग नहीं पाए। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जमीन पर गिरा कर बेरहमी से पीटा। किसी तरह वे घर पहुंचे और वहीं पर उनका इलाज चलता रहा। लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि आखिरकार शुक्रवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

सियाराम की मौत की खबर फैलते ही उनके गांव रुकन्दीपुर में बड़ी संख्या में ग्रामीण और बीजेपी कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए। सभी ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराज़गी जताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की। मृतक के परिजनों का कहना है कि पुलिस की बर्बर पिटाई के चलते ही सियाराम की जान गई है।

उन्होंने शासन-प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाई है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

वहीं, इस मामले में गाजीपुर एसपी इरज राजा ने अलग ही सफाई दी है। उनका कहना है कि यह मामला दो पक्षों के बीच विवाद का था। विवाद बढ़ने पर एक पक्ष के लोग थाने में आकर बैठ गए। इस दौरान अचानक लाइट चली गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। एसपी का दावा है कि पुलिस द्वारा कोई बर्बर कार्रवाई नहीं की गई है और पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी।

फिलहाल बीजेपी कार्यकर्ता की मौत से ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं में गुस्सा है। गांव में भारी भीड़ जुटने के कारण प्रशासन अलर्ट पर है। पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इस तरह गाजीपुर में पुलिस और आम जनता के बीच टकराव का यह मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। बीजेपी कार्यकर्ता की मौत के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मचने की संभावना है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और मृतक के परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।

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