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CBI मामला : आलोक वर्मा के खिलाफ नही मिल रहा आयोग को कोई ठोस सबूत

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक आलोक वर्मा पर लगे 2 करोड़ की घूस लेने के आरोपों की जांच कर रही है. सूत्रों का कहना है कि आयोग को जांच में उनके विरूद्ध कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं. 23 अक्तूबर को वर्मा के साथ विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को केंद्र गवर्नमेंट ने छुट्टी पर भेज दिया गया था. इसके बाद आयोग उच्चतम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायधीश एके पटनायक की अध्यक्षता में दोनों अधिकारियों के मामले की जांच कर रहा था.

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राष्ट्र के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने न्यायाधीश पटनायक को गवर्नमेंट द्वारा कराई जा रही सीवीसी जांच की अध्यक्षता करने के लिए चुना था. जांच के आदेश अस्थाना  वर्मा की लड़ाई सार्वजनिक होने के बाद दिए गए थे. दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे पर करप्शन के आरोप लगाए हैं. इतना ही नहीं CBI ने अपने नंबर दो के ऑफिसर के विरूद्ध 15 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की थी. वहीं ऑफिसर ने 24 अगस्त को वर्मा के विरूद्ध कैबिनेट सचिव को लेटर लिखा था.

कैबिनेट सचिव ने अस्थाना की शिकायत को सीवीसी के पास भेज दिया था. अस्थाना ने वर्मा पर हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये घूस के तौर पर लेने का आरोप लगाया है. सना से जांच एजेंसी मीट निर्यातक मोईन कुरैशी से संबंधित मामलों में पूछताछ कर रही थी. शुक्रवार को वर्मा के विरूद्ध जारी शुरुआती जांच समाप्त हो गई है. इसे सोमवार को मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को सौंपा जाएगा.

सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में राकेश अस्थाना द्वारा दिए गए विभिन्न सबूतों की जांच हुई है. जिसमें अस्थाना द्वारा वर्मा पर लगाए गए आरोपों में कुछ भी ठोस सामने नहीं आया है. जांच में सीवीसी केवी चौधरी  विजिलेंस कमिशनर शरद कुमार  टीएम बसीन भी शामिल थे. अस्थाना की शिकायत के दो महीने बाद CBI ने उनके, CBI डीएसपी देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद  सोमेश प्रसाद के विरूद्ध 15 अक्तूबर को सतीश बाबू के 4 अक्तूबर को दिए बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी.

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