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केंद्र गवर्नमेंट व इंडियन रिजर्व बैंक के बीच बढ़ा तनाव 

केंद्र गवर्नमेंट  इंडियन रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन के बीच तनाव  बढ़ता ही जा रहा है. वैसे यह पहली बार नहीं है जब गवर्नमेंट  भारतीय रिजर्व बैंक आमने-सामने हैं. जवाहर लाल नेहरू के समय में भारतीय रिजर्व बैंक के चौथे गवर्नर रहे बेनेगल रामा राव  गवर्नमेंट के बीच मतभेद थे. जिसकी वजह से उन्होंने जनवरी 1957 में अपने पद से त्याग पत्र दे दिया था.

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राव ने साढ़े सात वर्ष के कार्यकाल के बाद त्याग पत्र दिया था क्योंकि जवाहर लाल नेहरू ने वित्त मंत्री टी टी कृष्णमचारी (टीटीके) का साथ देते हुए यह साफ कर दिया था कि भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नमेंट की विभिन्न गतिविधियों का भाग है. वह गवर्नमेंट को सलाह दे सकता है लेकिन उसे गवर्नमेंट के साथ भी रहना है. यह बातें नेहरू ने जनवरी 1957 में एक लेटर में लिखी थीं. जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि राव को लगता है कि उनके लिए काम जारी रखना संभव नहीं है तो वह पद से त्याग पत्र दे सकते हैं. इसके कुछ दिनों बाद राव ने त्याग पत्र दे दिया था.

राव ने टीटीके पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया था. दोनों के बीच मतभेदों की शुरूआत एक बजट प्रस्ताव को लेकर हुई थी. टीटीके ने भारतीय रिजर्व बैंक को वित्त मंत्रालय का एक भाग बताया था. इसके अतिरिक्त उन्होंने संसद में इस बात को लेकर शंका जाहिर की थी कि वह किसी तरह के सोच विचार के लिए सक्षम है या नहीं. राव को लिखे लेटर में हिंदुस्तान के पहले पीएम  राहुल गांधी के नानाजी ने लिखा, ‘आरबीआई गवर्नमेंट को सलाह दे सकती है लेकिन उसे गवर्नमेंट के साथ तालमेल बनाकर रहना होगा.

नेहरू ने बोला था यह बिलकुल हास्यास्पद बात होगी यदि केंद्रीय बैंक अलग तरह की नीति अपनाए यदि वह गवर्नमेंट के उद्देश्यों या उसके उपायों से सहमत नहीं है. लेटर में नेहरू ने लिखा था, ‘आपने भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर दबाव डाला है. निश्चित रूप से यह स्वायत्त है लेकिन यह केंद्र गवर्नमेंट के नेतृत्व के गुलाम भी है. मौद्रिक नीतियों को निश्चित रूप से गवर्नमेंट की बड़ी नीतियों का अनुसरण करना चाहिए. वह गवर्नमेंट के मुख्य उद्देश्यों  नीतियों को चुनौती नहीं दे सकता है.

नेहरू ने लेटर में लिखा था, ‘जब आपने मुझसे बात की तो मैंने आपको बताया था कि केंद्र गवर्नमेंट नीतियां बना सकती है  भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र गवर्नमेंट की नीतियों के खिलाफकिसी तरह की नीति नहीं बना सकती है. आपने इसपर सहमति जताई थी. मगर आपके मेमोरेंडम में मुझे अलग दृष्टिकोण मिला है.‘ भारतीय रिजर्व बैंक का मानना था कि टीटीके के बजट प्रस्ताव से ब्याज दरें बढ़ जाएंगी  उसने केंद्रीय बोर्ड को एक प्रस्तावव भेजा था. 12 दिसंबर 1956 को बोर्ड ने गवर्नमेंट से बोला था कि वह उन सभी मामलों में भारतीय रिजर्व बैंकसे सलाह लें जिससे मौद्रिक संरचना  नीति पर प्रभाव पड़ता हो. उसी दिन नेहरू ने गवर्नर को लेटर लिखते हुए उनके (आरबीआई) अनुचित दृष्टिकोण को केंद्र के विरूद्धआंदोलनात्मक बताया था.

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