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सबरीमाला मंदिर स्त्रियों के लिए खोले जाने संबंधी न्यायालय के निर्णय को भाजपा मानने से कर रही मना 

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में भाजपा पर निशाना साधा है ने अपने कॉलम ‘रोकठोक’ मे भाजपा पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि सबरीमाला मंदिर स्त्रियों के लिए खोले जाने संबंधी न्यायालय के निर्णय को भाजपा मानने से मना कर रही है यही भाजपा महाराष्ट्र के कोल्हापुर की अंबाबाई  शनि शिंगणापुर मंदिर के मामले में न्यायालय के निर्णय के साथ खड़ी दिखी थी सामना में यह भी लिखा गया है कि कल तक राष्ट्र में मस्जिदों की पॉलिटिक्स की गई, अब मंदिरो की पॉलिटिक्स प्रारम्भ है जो हिंदुत्ववादी राम मंदिर पर खुलकर बोलने से कतराते हैं वे राम मंदिर का मुद्दा कोर्ट में है, ऐसा कहकर भाग जाते हैं

मुखपत्र में लिखा गया है कि भाजपा के जो नेता सबरीमाला मंदिर का फैसला मानने को तैयार नहीं हैं, कोर्ट श्रद्धा और आस्था के मुद्दों में छेड़छाड़ न करे, ऐसा खुलेआम कहते हैं तो हैरानी होती है

सामना में लिखा है, ‘हमारा भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन धर्म की पॉलिटिक्स जितना हम करते हैं, उतना कोई नहीं करता होगा, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का सवाल 25 सालोंसे पेंडिंग है हर चुनाव में अब राम मंदिर पर पॉलिटिक्स होती है, लेकिन मंदिर बिल्कुल भी नहीं बनता ‘ आगे लिखा गया है कि राजनीतिज्ञ अपनी सुविधानुसार श्रद्धा के मुद्दे पर कैसे पॉलिटिक्स करते हैं, इसका एक  उदाहरण मतलब केरल का सबरीमाला मंदिर है हिंदू धर्म से संबंधित रूढ़ि  परंपराओं का सख्ती से पालन करनेवाला यह मंदिर है, यहां स्त्रियों की एंट्री प्रतिबंधित है

महाराष्ट्र स्थित महालक्ष्मी मंदिर के गर्भगृह में स्त्रियों को जाने की इजाजत नहीं है, शनि शिंगणापुर के चबूतरे पर स्त्रियों का जाना निषेध था उसी तरह केरल के सबरीमाला मंदिर में स्त्रियोंपर पाबंदी है, सर्वोच्च कोर्ट में यह प्रकरण गया  न्यायालय ने सबरीमाला मंदिर में स्त्रियों को जाने से न रोका जाए, ऐसा आदेश दिया, मंदिर स्त्रियों के लिए खोल दिया गया इस पर केरल में लोग भड़क गए, सुप्रीम न्यायालय के इस फैसला के विरूद्ध महिलाएं ही सड़कों पर उतरीं  उन्होंने केरल में जनजीवन ठप कर दिया

सुप्रीम न्यायालय के फैसला को अमल में लाने में प्रशासन असक्षम सिद्ध हुआ  फैसला अधूरे में ही लंबित रह गया, जो हिंदुत्ववादी राम मंदिर पर खुलकर बोलने से कतराते हैं वह राम मंदिर का मुद्दा कोर्ट में है, ऐसा कहकर भाग जाते हैं भाजपा के वे नेता सबरीमाला मंदिर का फैसला मानने को तैयार नहीं हैं

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