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राजधानी में कम हुआ भारी बारिश का सिलसिला लेकिन इन राज्यों में अभी भी मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

असम और मेघालय में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी के साथ अगले 24 घंटे के दौरान अतिवृष्टि हो सकती है। उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल के पर्वतीय हिस्से, सिक्किम, कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल और माहे अलग- अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि बरसात के चार महीने के मौसम के दूसरे हिस्से में मानसून सामान्य रह सकता है. मौसम विभाग ने 2020 में दक्षिण पश्चिम मानसून के दूसरे हिस्से के दौरान वर्षा के अपने दीर्घकालिक पूर्वानुमान में कहा कि अगस्त में लंबी अवधि में वर्षा के औसत (एलपीए) की 97 प्रतिशत बारिश हो सकती है.

उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटे के दौरान कुछ जगहों पर हल्की जबकि कुछ जगहों पर मूसलाधार बारिश हुई है. कई नदियां खतरे के निशान के करीब या पार पहुंच गयी हैं. केन्द्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा, शारदा, घाघरा, राप्ती सहित प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है या फिर कुछ स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गया है.

आईएमडी ने कहा, ”मात्रा के आधार पर देखें तो इस मौसम के दूसरे हिस्से में पूरे देश में एलपीए की 104 प्रतिशत वर्षा हो सकती है जिसमें आठ प्रतिशत कम-ज्यादा की मानक त्रुटि शामिल है.” देश में 1961 से 2010 के बीच वर्षा का एलपीए 88 सेंटीमीटर था. 96 से 104 प्रतिशत के बीच एलपीए के मानसून को सामान्य माना जाता है.

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