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बजरंग पूनिया ने खुद को राष्ट्र का सबसे खास पहलवान किया साबित

बजरंग पूनिया ने खुद का राष्ट्र का सबसे पास पहलवानों में से एक साबित किया है लेकिन अपनी लय को बरकरार रखने के लिए उन्हें प्रलोभनों से बचना होगा जिसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है राष्ट्रमंडल  एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाला यह खिलाड़ी विश्व चैम्पियनशिप में दो पदक जीतने वाला इकलौता इंडियन है बजरंग ने खुद को सात वर्ष से मोबाइल फोन से दूर रखा, प्रतियोगिता के समय कभी भी घूमने नहीं जाते हैं  उन्हें नहीं पता कि सिनेमा हॉल कैसा होता है

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ये प्रलोभन भले ही ज्यादा बड़े नहीं हो लेकिन बजरंग को लगता है कि इससे सरलता से ध्यान भटक सकता है इसलिए खुद पर नयंत्रण रखना महत्वपूर्ण है, उसका नतीजा आप सब देख सकते है हरियाणा के 24 वर्ष के इस खिलाड़ी के लिए वर्ष 2018 सफलताओं से भरा रहा है जिसमें उन्होंने पांच पदक जीते हैं इन पांच में से तीन पदक बड़ी चैम्पियनशिप से आए हैं

योगी ने मोबाइल रखने से किया मना
बजरंग ने कहा, ‘‘मैं बहुत सारी चीजें करना चाहता हूं लेकिन खुद पर नियंत्रण रख रहा हूं मुझे हमेशा अपने पास फोन रखने का शौक है लेकिन 2010 में जब मैंने अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में खेलना प्रारम्भ किया था तब योगी भाई (योगेश्वर दत्त, जो उनके मेंटर भी हैं) ने मुझे ऐसा करने से मना किया था अभी भी जब वे मेरे इर्द गिर्द होते हैं तो मैं अपना फोन छुपा लेता हूं’’

अब मोबाइल नहीं छूते बजरंग
योगेश्वर दत्त की अकादमी में आयोजित हरियाणा गौरव कप के लिए यहां पहुंचे बजरंग ने कहा, ‘‘उन्हें पता है कि अब मेरे पास मोबाइल फोन है लेकिन उनके सामने मैं कभी भी इसका प्रयोग नहीं करता हूं अगर वह मेरे साथ 10 घंटे तक है तो मैं 10 घंटे तक अपना मोबाइल छूता भी नहीं हूं ’’ बजरंग से जब ट्विटर पर सक्रियता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनका ट्विटर हैंडल एक दोस्त संचालित करता है

सैर सपाटे पर नहीं जाते
बजरंग ने प्रतियोगिताओं के सिलसिले में 30 से ज्यादा राष्ट्रों की यात्रा की है लेकिन स्पर्धा के दौरान वह आयोजन स्थल, होटल  हवाईअड्डे के अतिरिक्त कहीं नहीं जाते  उन्होंने कहा, ‘‘ मैं कभी किसी प्रतियोगिता के दौरान सैर सपाटे के लिए नहीं जाता हूं अब योगी भाई मेरे साथ यात्रा नहीं करते लेकिन मैं घूमने की स्थान विश्राम  खेल पर ध्यान देना पसंद करता हूं राष्ट्रमंडल  एशियाई खेलों के दौरान भी बाउट के बाद कई खिलाड़ी बाहर गये थे लेकिन मैं कहीं नहीं गया था ’’

संन्यास लिया ताकि बजरंग को ओलंपिक स्वर्ण के लिये तैयार कर सकूं
योगेश्वर दत्त ने बोला कि मैट से संन्यास लेने का निर्णय कठिन नहीं था क्योंकि उनके पास बजरंग पूनिया जैसा शिष्य था  उन्हें लगता है कि वह ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाला हिंदुस्तान का पहला पहलवान बन सकता है केडी जाधव  सुशील कुमार के बाद योगेश्वर ओलंपिक पदक -2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक- जीतने वाले तीसरे इंडियनपहलवान हैं

बजरंग के लिए ओलंपिक महत्वपूर्ण
योगेश्वर ने अपने पास करियर में 2014 में राष्ट्रमंडल खेलों  एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते थे योगेश्वर ने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि बजरंग ओलंपिक पदक के लिये तैयार रहे वह अच्छा है लेकिन  भी बेहतर कर सकता है मैं 2020 में भाग नहीं सकता इसलिये बेहतर यही है कि हम बजरंग की मदद करें वह तोक्यो में स्वर्ण पदक के लिये प्रबल दावेदारों में एक होगा ’’

बजरंग होता तो संन्यास नहीं लेता
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा करियर अच्छा रहा मैंने चार ओलंपिक में भाग लिया हमारे पहलवानों में बजरंग अच्छा कर रहा है  बेहतर हो सकता है इसलिये उसे मौका  योगदान देना अहम है ’’ कुश्ती को छोड़ना क्या सरल निर्णय था? योगेश्वर ने कहा, ‘‘अगर बजरंग नहीं होता तो मैं संन्यास नहीं लेता मैं  स्पर्धाओं में भाग लेता  शायद एक वजन वर्ग ऊपर हो जातालेकिन मुझे लगा कि यह सही निर्णय है वह अभी 24 वर्ष का है जूनियर स्तर से उसने अपार प्रतिभा दिखायी मैं हिंदुस्तान के लोगों को अब बजरंग में योगेश्वर को देखना चाहता हूंमेरा करियर लंबा रहा  मैं नहीं चाहता कि बजरंग इससे प्रभावित हो ’’

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