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दिल का दौरा पड़ने से लोकसभा के पू्र्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का निधन, सर्वश्रेष्ठ सांसद अवार्ड से भी किये जा चुके हैं सम्मानित

नई दिल्ली. पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी को दिल का दौरा पड़ने से सोमवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। परिजनों के अनुसार सोमनाथ चटर्जी ने सोमवार को सुबह 8.15 बजे अंतिम सांस ली। सोमनाथ चटर्जी CPM के दिग्गज नेता थे, हांलाकि बाद में उन्हें पार्टी ने निकाल दिया था।

दिल का दौरा पड़ने से हुआ निधन

लंबे समय तक सांसद रहे सोमनाथ चटर्जी को रविवार को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्हें कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने सोमवार को सुबह 8।15 बजे इस दुनिया को अलविदा कह गए।

किडनी की समस्या से थे परेशान

सोमनाथ चटर्जी को रविवार को दिल का दौरा पड़ा था। इस आघात के बाद उन्हें कोलकाता के एक निजी अस्पताल में वेंटिलेशन पर रखा गया था। पश्चिम बंगाल में मंत्री रहे सीपीएम नेता अब्दुस सत्तार ने बताया कि सोमवार सुबह 8.15 बजे सोमनाथ चटर्जी ने इस दुनिया को अलविदा कहा। वो किडनी की समस्या से भी जूझ रहे थे। चटर्जी को जून में भी स्ट्रोक आया था और वो एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे थे।

चटर्जी 1971 से 2009 तक सोमनाथ चटर्जी लोकसभा सांसद चुने गए। इस दौरान जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र से 1984 में केवल एक बार उन्हें ममता बनर्जी से हार का सामना करना पड़ा था। 1968 में चटर्जी CPI (M) में शामिल हुए थे और 2008 में पार्टी से निकाले जाने तक रहे। सोमनाथ चटर्जी 10 बार लोकसभा सांसद चुने गए। वह एक अच्छे क़ानून के जानकार भी थे।

 1971 में पहली बार लड़ा लोकसभा चुनाव

चटर्जी का जन्म 25 जुलाई, 1929 को हुआ था। चटर्जी के पिता एनसी चटर्जी हिन्दू महासभा से जुड़े थे। सोमनाथ चटर्जी ने ब्रिटेन के मिडल टेंपल से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी। चटर्जी ने पहली बार 1971 में लोकसभा चुनाव लड़ा था।

खास बात यह है कि उन्होंने अपने पिता की मौत से ख़ाली हुई सीट पर चुनाव लड़ा था। पश्चिम बंगाल के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से चटर्जी ने चुनाव लड़ा। इनमें बर्दवान, बोलपुर और जाधवपुर शामिल हैं। ममता बनर्जी ने 1984 में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सोमनाथ चटर्जी को पटखनी दी थी। ममता ने पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था।

सर्वश्रेष्ठ सांसद के अवॉर्ड से हो चुके हैं सम्मानित

सोमनाथ चटर्जी का आदर सभी पार्टियों में था। वो कई संसदीय समिति के सदस्य रहे। 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवॉर्ड मिला था। लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर भी सोमनाथ चटर्जी की तारीफ़ होती थी। सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद चटर्जी राजनीतिक हालात पर बेबाक टिप्पणी करते थे।

चटर्जी ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर सीपीएम को आगाह किया था और आख़िरकार ममता ने 2011 में सीपीएम को सत्ता से उखाड़ फेंका। चटर्जी ने प्रकाश करात के नेतृत्व वाली सीपीएम की भी आलोचना की थी।

फोटो- फाइल।।

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