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ये फीडर एंबुलेंस दूरस्थ गांवों में लोगों को देगी प्राथमिक इलाज, और कई सुविधाएं

आंध्र प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बसे दूरस्थ गांव के लोगों के लिए सेहत सुविधा के लिए अस्पताल तक पहुंचना किसी बड़ी जंग से कम नहीं है. बिना सड़कों की इस स्थान पर एंबुलेंस का आना भी मुमकिन नहीं है. जिले में मौजूद प्राथमिक सेहत केंद्र  अस्पताल भी बहुत ज्यादा दूर हैं.
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विजयनगरम जिले में बसे इन गांवों के लोगों ने आपात स्थिति में गर्भवती स्त्रियों को सेहत केंद्र तक पहुंचाने का रास्ता भी निकाला जिसे डोली बोला जाता है, लेकिन वह भी अच्छा सिद्ध नहीं हुआ. यह एक तरह का अस्थिर स्ट्रेचर है. लेकिन 20 किमी की दूरी पर स्थित सेहत केंद्र तक डोली से पहुंचाने के कारण कई स्त्रियों को नुकसान झेलना पड़ा है.

यहां रहने वाली आदिवासी महिला जिन्दामी का 29 जून को ही मिसकेरेज हुआ है. वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाई थी. अधिक ब्लीडिंग के कारण उसकी जान भी कठिन से बच पाई है. लेकिन इस घटना ने नेशनल ह्यूमन राइट कमिशन (एनएचआरसी) का ध्यान खींचा. उन्होंने यहां की भौगोलिक संरचना को जानने के लिए अधिकारियों को भेजा. बहुत ज्यादाविचार करने के बाद राज्य गवर्नमेंट ने आपता की समस्याओं के लिए एक नया उपाय निकाला है.

जिसके तहत खास तरह की फीडर एंबुलेंस चलाई जाती हैं, जिसके साथ में एक अन्य गाड़ी भी जुड़ी होती है. इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवेलपमेंट एजेंसी (आईटीडीए) से जुड़े ऑफिसर ने बताया कि उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में 24 फीडर एंबुलेंस को भेजा है. प्रत्येक एंबुलेंस 4-5 दूरस्थ गांवों को कवर करती है. यह सेवा अप्रैल 2018 से प्रारम्भ हुई है. हर एंबुलेंस में एक 6.5 फीट का बॉक्स जुड़ा होता है, जिसमें स्लीपर की सुविधा है.

यह एंबुलेंस 150 सीसी मोटरसाइकिल से जुड़ी है. जिससे मरीजों को उपचार के लिए ले जाया जा सके. इनमें से प्रत्येक वाहन 1.2 लाख रुपये मूल्य का है. लोगों को जब भी मदद की जरूरत होती है तो वह 108 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं. जिसके बाद ड्राइवर उन्हें 15-20 मिनट में लेने आ जाता है.
बाइक ड्राइवरों को प्राथमिक चिकित्सा  बुनियादी सेहत तरीकों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. बीते 6 महीने में 684 मरीजों को ये सेवा मिली है. लोगों को गंभीर हालत में भी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र  अस्पताल ले जाया गया  वह अच्छा होकर अपने घर भी आए. इस सेवा से यहां के लोग बेहद खुश हैं.

एंबुलेंस के ड्राइवर का कहना है कि मरीज को अस्पताल पहुंचाने में बहुत सी दिक्कतें आती हैं लेकिन लोकल लोगों की सहायता से सड़क को साफ रखा जाता है. वह समर्थन देते हैं, जिससे सुविधा मिलती है.

इस छोटी सी एंबुलेंस में प्राथमिक चिकित्सा किट होती है. जिसमें छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर, थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर, प्लस ऑक्सीमीटर  इंट्रावीनस फ्लूड इन्फ्यूजन सेट शामिल है.ऑफिसर ने ये भी बताया कि जब ड्राइवर मरीज को लेने आता है तो वह फोन पर अस्पताल वालों को मरीज के बारे में जानकारी भी दे देता है, जिसके कारण वह उसके उपचार के लिए पूरी तैयारी करके रखते हैं.

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