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दलितों की नाराजगी दूर नहीं कर सकी सरकार, 9 अगस्त को भारत बंद

लखनऊ. भले ही केंद्र सरकार अपने को दलित-पिछड़ों की सरकार गिनाने में लगी हो, बावजूद इसके लोग इससे खुश नहीं नजर आ रहे हैं। गरीब इसे अमीरों की सरकार कहते हुए कड़ी निंदा कर रहे हैं और इससे शोषित सरकार घोषित कर रहे हैं। इसी बीच दलित तबका भी सरकार की नीतियों से नाजार है जिसको लेकर एक बार फिर से दलित संगठनों की तरफ से 9 अगस्त को भारत बंद का ऐलान किया गया है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

बंद के चलते प्रशासन की तरफ से सक्रियता बरती जा रही है। डीजीपी मुख्यालय से जिलों के पुलिस अफसरों को रेलवे, हवाई अड्डो ,धार्मिक स्थलों समेत सभी प्रमुख स्थानों पर कड़े सुरक्षा इंतज़ाम के निर्देश जारी किये गए हैं। इसके अलावा स्टेट इन्टीजेलेन्स और अन्य जांच एजेंसियो को भी सतर्क रहने के लिए भी निर्देश जारी हुए हैं।

मांगों को लेकर करेंगे आवाज बुलंद
बता दें कि एससी/एसटी एक्ट को सख्त बनाने समेत कई मांगों को लेकर कल 9 अगस्त को ऑल इंडिया आंबेडकर महासभा (AIAM) समेत कई दलित संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया है। दलित संगठन देशभर में अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करेंगे। हालांकि , एससी- एसटी बिल और संशोधन लोकसभा में पारित कर दिए गए। अब इसे राज्यसभा में पेश किया गया है।

सरकार पर दबाव
2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी भी इस मामले पर फूंक-फूंककर कदम रख रही है। ऐसे में पार्टी यह नहीं चाहेगी कि दलित वर्ग उनसे नाराज हों। जानकारी के मुताबिक, इस मुद्दे पर भाजपा के अपने सहयोगी भी सरकार पर दबाव बना रहे हैं। कुछ पार्टी के लोग इसे चाल भी बता रहे हैं। एनडीए में शामिल लोक जन शक्ति पार्टी के नेता राम विलास पासवान सहित अन्य दलित सांसद भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग चुके हैं।

मालूम हो कि बीते 2 अप्रैल को दलित संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन के बीच भारत बंद किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संसोदन विधेयक 2018 लोकसभा में पेश किया। मायावती भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संशोधन विधेयक 2018 लोकसभा में पारित होने का श्रेय बसपा कार्यकर्तोओं को दे रही हैं।

संगठनों की प्रमुख मांगें
दलितों के खिलाफ देश में बढ़ रहे एससी/एसटी एक्ट में बदलाव लाने एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्ति के लिए नया रोस्टर आदि मुद्दों को लेकर दलित एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। इसके अलावा दलित संगठनों की मांग है कि दलितों के खिलाफ आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गोयल की एनजीटी के अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया जाय।

फोटो- फाइल।।

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