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मामले की दोबारा जांच का आदेश देने का कोई कारण नहीं है- अंकुर शर्मा

सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले में आगे की जांच या पुन: जांच सीबीआई से कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका आरोपियों की ओर से दायर की गई थी। न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने साफ कहा कि हम इस याचिका पर विचार नहीं कर सकते। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एसआईटी की जांच निष्पक्ष नहीं है। पीठ ने आरोपी परवेश कुमार के वकील अंकुर शर्मा से कहा, ‘मामले की दोबारा जांच का आदेश देने का कोई कारण नहीं है।

पीठ ने यह भी पाया कि इस मामले में चार्जशीट दायर की जा चुकी है और करीब 80 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अंकुर ने पीठ से कहा कि गवाहों के बयान में विरोधाभास है। उन्होंने कुछ गवाहों पर पुलिस द्वारा दबाव डालने का भी आरोप लगाया। इस मामले में दो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट विरोधाभासी हैं। मामले में कुछ पुलिसकर्मी भी आरोपी हैं, ऐसे में जांच निष्पक्ष तरीके से न होने की आशंका है। लिहाजा इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए।

वहीं 18 वर्षीय आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा है कि भारतीय संदर्भ में यह विश्वास नहीं किया जा सकता कि 60 वर्षीय एक पिता राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे अपने बेटे को बुलाकर उसे बलात्कार जैसा घृणित काम करने के लिए कहेगा। मई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का ट्रायल कठुआ से पंजाब के पठानकोट में कराने का निर्देश दिया था। इस घटना से देशभर में आक्रोश को देखते हुए सरकार ने अध्यादेश लाकर 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामले में अधिकतम सजा फांसी कर दी थी।

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