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लियोन लेडरमैन का 96 साल की उम्र में अमेरिका के रेक्सबर्ग शहर में हुआ निधन

गॉड पार्टिकल हिग्स बोसॉन की खोज करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिकविद लियोन लेडरमैन का 96 साल की उम्र में अमेरिका के रेक्सबर्ग शहर में बुधवार को निधन हो गया। साल 1988 में लियोन को म्यूऑन न्यूट्रीनो की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार मिला था। उन्होंने “द गॉड पार्टिकल’ नाम की किताब भी लिखी थी। इससे उन्हें बहुत प्रसिद्धि मिली थी। इस किताब में उन्होंने हिग्स बोसॉन के बारे में बताया था। जिसे आखिरकार 2012 में ढूंढ लिया गया और इसके खोज के लिए बेल्जियम के भौतिक विज्ञानी फ्रांस्वा इंगलर्ट और ब्रिटेन के पीटर हिग्स को 2013 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

क्या है गॉड पार्टिकल

हिग्स बोसॉन को “गॉड पार्टिकल” भी कहा जाता है। वैज्ञानिक बताते हैं, “हिग्स बोसोन से कणों को भार मिलता है। यह सुनने में भले ही सामान्य लगता हो, लेकिन अगर कणों में भार नहीं होता तो फिर तारे नहीं बन सकते थे। आकाशगंगाएं नहीं होतीं और परमाणु भी नहीं होते। ब्रह्रांड कुछ और ही होता।”

भार या द्रव्यमान वो चीज है जो कोई चीज अपने अंदर रख सकता है। अगर कुछ नहीं होगा तो फिर किसी चीज़ के परमाणु उसके भीतर घूमते रहेंगे और जुड़ेंगे ही नहीं। इस सिद्धांत के अनुसार हर खाली जगह में एक फील्ड बना हुआ है जिसे हिग्स फील्ड का नाम दिया गया इस फील्ड में कण होते हैं जिन्हें हिग्स बोसोन कहा गया है। जब कणों में भार आता है तो वो एक दूसरे से मिलते हैं।

जेनेवा के परमाणु अनुसंधान संगठन सर्न के वैज्ञानिक 2012 में इस कण को खोज पाए। यूरोपियन पार्टिकल फिजिक्स लैबोरेट्री ने इसका ऐलान किया था।

इस कण की खोज के लिए हजारों वैज्ञानिकों को लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में प्रोटॉनों की टक्कर से मिले काफी लंबे-चौड़े आंकड़ों को खंगालना पड़ा।

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर की लागत 10 अरब डॉलर यानी करीब 62 हज़ार करोड़ रुपए आई और ये स्विटजरलैंड और फ्रांस की सीमा पर 27 किलोमीटर में फैला हुआ है।

लेकिन 10 खरब में से एक टक्कर से ही एक हिग्स-बोसॉन मिल पाता है। सर्न को ये तय करने में भी कुछ समय लगा कि ये खोजा गया कण हिग्स-बोसॉन ही है और उसी तरह का कोई दूसरा कण नहीं है।

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