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ई-कचरा की राख की कपकपी लखनऊ तक, डीएम और शासन पर जुर्माना

ई डस्ट का उठान न होने पर नगर विकास के प्रमुख सचिव ने प्रदूषण, सिंचाई और नगर निगम के अधिकारियों को तलब कर नाराजगी जताई। उन्होंने अब तक ई डस्ट न हटाने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने के आदेश किए हैं। इस आदेश के बाद अधिकारियों में खलबली मच गई है। चर्चा है कि इस प्रकरण में किस किस अधिकारी पर गाज गिरेगी। क्योंकि एनजीटी इस मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव को दिल्ली तलब कर चुकी है। डीएम और शासन पर जुर्माना भी लगाया जा चुका है। एनजीटी के सामने अफसरों की ओर से दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का रिकार्ड पेश करना है। इसके लिए सूची तैयार की जा रही है।

शासन का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर न तो ई-कचरे को जलने पर रोक पाए और न ही काली राख हटाई जा सकी है। अफसरों का कहना है कि नगर निगम के टंचिंग ग्राउंड पर स्थान उपलब्ध कराकर पालीथिन बिछवाने और एमडीए के डंफर उपलब्ध कराने के बावजूद जहरीली राख का उठान नहीं हो रहा है। इसके लिए नगर आयुक्त ने कड़ा पत्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को लिखा है। इसके बावजूद राख उठनी शुरू नहीं हुई है। दूसरी ओर दिल्ली से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसराें ने भी कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

हमने टंचिंग ग्राउंड की जगह उपलब्ध कराकर व्यवस्था करा दी है। निगम पूरा सहयोग करने को तैयार है। डस्ट का उठान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को कराना है।

जहरीली राख के उठान से हमारा कुछ लेना-देना नहीं है। इसका नगर आयुक्त और डीएम को देखना है। राख का उठान का आदेश देने से ही नहीं हो जाएगा। इसके लिए 50 लाख रुपये का इंतजाम करना होगा है। नगर निगम या जिला प्रशासन इसकी व्यवस्था करेगा, तभी राख उठ पाएगी।

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