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फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने बोला था कि राफेल करार ‘सरकार से सरकार’ के बीच होगा तय

राफेल सौदों पर फ्रांस के राष्ट्रपति का समर्थन मिला है फेंच प्रेसीडेंट एमैनुएल मैक्रों का कहना है कि पीएम मोदी इस बारे में हकीकत कह रहे हैं यह सौदा दो राष्ट्रों के सरकारों के बीच हुआ था फ्रांस के राष्ट्रपति ने बोला कि हिंदुस्तान  फ्रांस के बीच मजबूत गठबंधन है मैं किसी  बात पर कॉमेंट नहीं करना चाहता हूं बता दें राफेल करार के मुद्दे पर हिंदुस्तान में बड़ा टकराव पैदा हो चुका है  यह टकराव फ्रांस की मीडिया में आई उस समाचार के बाद पैदा हुआ जिसमें पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने बोला कि राफेल करार में इंडियन कंपनी का चयन नयी दिल्ली के इशारे पर किया गया था

इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने बोला था कि राफेल करार ‘सरकार से सरकार’ के बीच तय हुआ था  हिंदुस्तान एवं फ्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों को लेकर जब अरबों डॉलर का यह करार हुआ, उस वक्त वह सत्ता में नहीं थे संयुक्त देश महासभा के सत्र के इतर एक प्रेस कांफ्रेंस में मैक्रों से पूछा गया था कि क्या हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने किसी वक्त फ्रांस गवर्नमेंट या फ्रांस की महान एयरोस्पेस कंपनी दसाल्ट से बोला था कि उन्हें राफेल करार के लिए इंडियन साझेदार के तौर पर रिलायंस को चुनना है

​मैक्रों ने मंगलवार को बोला था,‘मैं बहुत साफ-साफ कहूंगा यह गवर्नमेंट से गवर्नमेंट के बीच हुई वार्ता थी  मैं सिर्फ उस बात की तरफ संकेत करना चाहूंगा जो पिछले दिनों पीएम(नरेंद्र) मोदी ने बहुत स्पष्ट तौर पर कही ’ मैक्रों ने राफेल करार पर टकराव पैदा होने के बाद अपनी पहली रिएक्शन में बोला था,‘मुझे  कोई टिप्पणी नहीं करनी मैं उस वक्त पद पर नहीं था  मैं जानता हूं कि हमारे नियम बहुत स्पष्ट हैं ’

क्या बोला था ओलांद ने?
पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ‘मीडियापार्ट’ नाम की एक फ्रांसीसी खबरिया वेबसाइट से बोला था कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने 58,000 करोड़ रुपए के राफेल करार में फ्रांसीसी कंपनी दसाल्ट के इंडियन साझेदार के तौर पर उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस के नाम का प्रस्ताव दिया था  इसमें फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं था

मीडिया रिपोर्ट में ओलांद के हवाले से बोला गया था,‘भारत गवर्नमेंट ने इस सेवा समूह का प्रस्ताव किया था  दसाल्ट ने (अनिल) अंबानी समूह के साथ वार्ता की हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, हमने वह वार्ताकार लिया जो हमें दिया गया ’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से वार्ता के बाद 36 राफेल विमानों की खरीद का ऐलान किया था करार पर अंतिम मुहर 23 सितंबर 2016 को लगी थी

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