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धरती और समुद्र में जमी बर्फ की परतों में बदलाव पर रखेगा नजर

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शनिवार को एक ऐसा उपग्रह लांच किया, जो धरती पर बर्फ की परतों, ग्लेशियरों और समुद्री बर्फ में होने वाले बदलावों का पता लगाएगा। उपग्रह को आइससेट-2 (क्लाउड एंड लैंड एलेवेशन सेटेलाइट) नाम दिया गया है। इसे शनिवार को अमेरिका के वैंडेनबर्ग एयरफोर्स बेस से भारतीय समयानुसार दोपहर 3.32 बजे डेल्टा-2 रॉकेट के जरिये लांच किया गया। आइससेट-2 में वर्तमान में प्रयोग हो रही तकनीकों से बेहतर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह उपग्रह ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका को ढकने वाली बर्फ की ऊंचाई में औसत बदलाव का पता लगाएगा। साथ ही बताएगा कि इनके जलस्तर को बढ़ाने में बर्फ की कितनी भूमिका है। इससे पहले नासा ने 2003 में आइससेट लांच किया था।

शोधकर्ताओं को मिलेगी काफी मदद
नासा के मुताबिक, एक अरब डॉलर की लागत से बना आइससेट-2 धरती पर बर्फ की परतों, ग्लेशियरों और समुद्री बर्फ में होने वाले बदलावों की सटीक जानकारी देगा। खास तकनीक के कारण यह बर्फ की ऊंचाई में आने वाले छोटे बदलाव का भी आसानी से पता लगा सकता है। इससे शोधकर्ताओं को काफी मदद मिलेगी।

जंगल की ऊंचाई का पता लगाने में भी सक्षम 
आइससेट-2 आधुनिक टोपोग्राफिक लेजर एल्टीमीटर सिस्टम (एटलस) लाइट फोटॉन्स के जरिये बर्फ की ऊंचाई में बदलाव के साथ जंगलों की ऊंचाई का भी पता लगाएगा। इसके लिए अंतरिक्ष यान से धरती तक जाने और वापस लौटने में लगे फोटांस के समय का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे प्राप्त जानकारी से समुद्री लहरों और तूफानों के स्तर का भी पता लगाया जा सकेगा।

आइससेट से अधिक सटीक है आइससेट-2
-आइससेट एक लेजर बीम के जरिये धरती पर बर्फ की परतों की ऊंचाई का पता लगाता था, जबकि आइससेट-2 छह लेजर बीम के जरिए यह काम करेगा।
-आइससेट-2 में आईससेट के मुकाबले बेहतर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह हर सेकेंड 10000 बार लेजर बीम छोड़ेगा।
-आइससेट फुटबॉल मैदान के बराबर बर्फ की परतों में बदलाव को मापने में सक्षम है, जबकि आइससेट-2 एक इंच के छठवें हिस्से यानी पेंसिल की चौड़ाई के बराबर बदलाव को भी माप सकता है।

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