Breaking News

डेढ़ करोड़ का मालिक बना 200 रुपये उधार लेकर लॉटरी खरीदने वाला पड़ोसी

मनोज कुमार ने एक पड़ोसी से 200 रुपए उधार लेकर लॉटरी का एक टिकट खरीदा था. लेकिन वह टिकट उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा इसका अंदाजा शायद ही उन्हें था.भाग्य ने उनके दरवाजे पर दस्तक दी  उस टिकट ने उन्हें डेढ़ करोड़ रुपये का मालिक बना दिया है. यह समाचार मिलने के बाद मनौज ने अपनी बड़ी बेटी को बताया कि वह अब अपने अधूरे सपने को पूरा कर सकती है. उनकी बेटी पढ़ाई बीच में छोड़ने की कगार पर थी. उसने बेटी को बताया कि वह अब इंडियन पुलिस सेवा में शामिल होने की तैयारी कर सकती है, जिसका उसने हमेशा से सपना देखा है. Image result for पड़ोसी से 200 रुपये उधार लेकर खरीदी लॉटरी

कुमार ने अपनी दूसरी बेटी से बोला है कि वह नर्स बनने की बजाए चिकित्सक बनने की प्रयास कर सकती है. पंजाब के संगरुर के रहने वाले 40 वर्ष के मनोज  उनकी पत्नी राज कौर कुछ दिनों पहले तक गांव के नजदीक बने ईंट के भट्ठे पर मजदूरी करके कठिन से 250 रुपये कमा पाते थे. उनके लिए जिंदगी बहुत ज्यादा कठिन थी. वह जो कमाते उससे कठिन से भरपेट खाना खाते थे. लेकिन उनकी जिंदगी उस समय बदल गई जब उन्होंने राज्य गवर्नमेंट की राखी बंपर लॉटरी जीत ली.

रातोंरात एक दिहाड़ी मेहनतकश लोग करोड़पति बन गया. अब उनके आस-पास प्रोपर्टी एजेंट  बैंकर्स निवेश की योजना लेकर आ रहे हैं. उनके गांव में वह किसी हीरो से कम नहीं समझे जा रहे हैं. कुमार को यदि अब कोई दुख है तो वह यही है कि वह अपने बीमार पिता हवा सिंह को अच्छा नहीं कर पाए. सिंह की हाल ही में अस्थमा की वजह से मौत हो गई थी.कुमार ने कहा, ‘मुझे यह लॉटरी पहले जीतनी चाहिए थी. शायद मेरे पिता बच जाते. पिता की मौत के बाद मैं ईंट के भट्ठे पर वापस गया. वहां कार्य से ज्यादा घंटे देने के बावजूद मुझे एक दिन के 250 रुपये से ज्यादा कभी नहीं मिले. मुझे हर ईंट के 50 पैसे मिला करते थे.

वह अब लॉटरी के पैसों से खरीदना चाहते हैं. वह अपने परिवार के लिए एक पक्का मकान बनाना चाहते हैं ताकि उन्हें टूटे-फूटे घर में ना रहना पड़े. वह अपना एक छोटा सा व्यापार प्रारम्भ करना चाहते हैं जिसके लिए करीबी रिश्तेदारों  दोस्तों से वार्ता चल रही है. मनोज की मां कृष्णा देवी ने बताया कि वह 1984 में मांडवी गांव आकर बस गए थे. उन्होंने कहा, ‘हमारे कुछ रिश्तेदार यहां रहते हैं. हरियाणा के नरवाना जिला के गांव में हर वर्ष बाढ़ की वजह से फसलें बर्बाद हो जाती थीं. यहां पंचायत ने गांव के बाहरी एरिया में हमें 200 स्कवायर यार्ड की जमीन दी है. वह अच्छे दिन थे  उस समय लोग पैसों को आज की तरह इतनी अहमियत नहीं देते थे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *