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मध्य अगस्त में हुई भारी बारिश से पहले ही भरे हुए थे केरल के बांध

केरल बाढ़ पर विस्तार से की गई जांच में पता चला है कि भारी बारिश से पहले ही राज्य के बांधों में पानी भरा हुआ था। इसके बाद 15-17 अगस्त के बीच आई भारी बारिश से जल स्तर और भी ज्यादा बढ़ गया और बाढ़ आ गई। केरल में तीन दिनों की भारी बारिश के दौरान 12 बिलियन क्यूबिक तक पानी भर गया था। यह यहां के जलाशयों की क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा था। यह रिसर्च सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्लूसी) द्वारा की गई थी।

सीडब्लूसी ने अपनी ये रिपोर्ट वॉटर सोर्स मिनिस्ट्री को बीते हफ्ते ही सौंपी है। केरल सरकार को ये रिपोर्ट सोमवार को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय मौसम विभाग ने राज्य सरकार को भारी बारिश की चेतावनी दी थी लेकिन इतनी ज्यादा बारिश हो सकती है, इस बारे में कोई सूचना नहीं दी थी। वहीं विपक्षी पार्टी के नेता रमेश चेन्नीथला ने इस बाढ़ को मानव जनित आपदा  बताया है। नेता ने ये भी कहा कि सीडब्लूसी खुद को बचाना चाहती है इसलिए ऐसा बोल रही है। चेतावनी मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने बांध के दरवाजे नहीं खोले।

एक तरफ जहां ये रिपोर्ट कह रही है कि ये बाढ़ मानव जनित आपदा नहीं थी। वहीं विपक्ष सरकार पर आरोप लगाकर इसे मानव जनित आपदा और बांधों का गलत प्रबंधन बता रहा है। वहीं सीडब्लूसी के एक अधिकारी ने कहा कि बाढ़ आने का मुख्य कारण बारिश ही था। 1 अगस्त से 19 अगस्त तक सामान्य से 164 फीसदी अधिक बारिश हुई। इसके बाद जून-जुलाई में भी ये दिक्कत जारी रही। 15-17 अगस्त की बारिश की 1924 की बाढ़ से तुलना की जा सकती है।

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