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दिल्ली के सीएम केजरीवाल पर भड़की पहलवान दिव्या

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में संपन्न 18वें एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाले 11 एथलीट्स को सम्मानित किया। हालांकि, इसके बाद खुद मुख्यमंत्री एक पहलवान के गुस्से का शिकार हो गए। एशियाई खेल 2018 में रेसलिंग में देश को ब्रॉन्ज (कांस्य) मेडल दिलाने वाली पहलवान दिव्या काकरण ने दिल्ली के सीएम पर शब्दों का हमला बोल दिया।

दिव्या ने दिल्ली के सीएम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने तब किसी प्रकार की मदद नहीं की, जब मुझे इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। दिव्या ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में मेडल जीतने के बाद आपने मुझसे मदद का वादा किया था। इसके बाद एशियाई खेलों की तैयारी के संबंध में मैंने आपको पत्र लिखा तो कोई जवाब नहीं मिला। मेरे फोन का भी जवाब नहीं दिया गया।

एशियाई खेलों में महिलाओं की फ्रीस्टाइल 68 किग्रा वर्ग में कांस्य मेडल जीतने वाली दिव्या ने कहा, ‘मैं आज यहां पहुंची हूं, इसलिए सभी मदद कर रहे हैं। मेडल जीतने पर सरकार एथलीट्स की मदद कर रही है। मगर जब मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब किसी ने मेरी मदद नहीं की। मैंने जब कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता, तब कोई मदद नहीं की गई। मुख्यमंत्री से कहा भी कि गरीब बच्चों के बारे में सोचिए। कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में मैंने ब्रॉन्ज समेत दिल्ली को लगातार 12 मेडल दिए। मैं कहना चाहती हूं कि आप अभी मेरे लिए इतना कर रहे हैं, लेकिन जब एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल आया था, तब मेरे लिए कुछ भी नहीं हुआ था।’

दिव्या यही नहीं रुकीं। उन्होंने आगे कहा, ‘मैं जिन हालातों से लड़कर यहां आई हूं, इस तरह के कई बच्चे हैं। उनके लिए भी कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। मेडल विजेता ने हरियाणा और दिल्ली की खेल सुविधाओं की तुलना करते हुए कहा, ‘हरियाणा में देखिए खिलाड़ियों को कितना समर्थन हासिल है। वहां 3 करोड़ मिलते हैं और यहां 20 लाख। हालांकि, इस बार एक करोड़ रुपए दिए गए। हरियाणा में कहते हैं घी है, दूध है। घी-दूध दिल्ली में भी है, लेकिन यहां समर्थन नहीं है।’

दिव्या ने नाराजगी जताने के साथ-साथ एक अपील भी की

दिव्या ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के सामने अपनी नाराजगी प्रकट की। उन्होंने कहा, ‘हम भले ही गरीब हैं, लेकिन हमारे हौसले बुलंद हैं। हमारे अंदर कुछ कर गुजरने की ज्वाला है। मैं आज पानी में भी पहलवानी कर रही हूं। अगर लोगों का समर्थन मिला तो निश्चित ही नतीजे बहुत अच्छे मिलेंगे। नए बच्चों को मदद की जरूरत है। हरियाणा को ज्यादा मेडल इसलिए मिलते हैं क्योंकि उन्हें समर्थन हासिल है। अगर हमें भी समर्थन मिले तो इतनी क्षमता है कि सबसे ज्यादा मेडल दिल्ली में आएंगे, जिसमें ज्यादा संख्या गोल्ड मेडल की होगी।’

दिव्या की बात से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सहमति जताई और ध्यान दिलाया कि उस समय उनकी सरकार कई प्रकार के विरोधों का सामना कर रही थी। केजरीवाल ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार जल्द ही खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए दो नीतियां तैयार करेगी। सीएमओ से जारी एक बयान में बताया गया कि पहली नीति का नाम ‘प्ले एंड प्रोग्रेस’ होगा, जिसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने जीवन में एक बार पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आर्थिक व खेल संबंधी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।

इस नीति को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए विशेषज्ञों की समिति तैयार की जाएगी, जिसमें दिग्गज खिलाड़ी और अन्य अधिकारी शामिल होंगे। यह समिति हर मामले में दी जाने वाली आर्थिक और खेल संबंधी सुविधाओं से संबंधित फैसला लेगी।

दूसरी नीति को ‘मिशन एक्सिलेंस’ नाम दिया जाएगा और यह नीति युवावस्था में प्रतिभाओं की खोज पर ध्यान केंद्रित करेगी, ताकि उभरते खिलाड़ियों को उनके खेल में उत्तीर्ण बनाए जाने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। उन्हें हर प्रकार की सुविधाएं दी जाएगी।

पुरस्कार राशि में इजाफा

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले एथलीट्स को दी जाने वाली नकद पुरस्कार इनामी राशि में इजाफा किया है। ऐसे में दिल्ली सरकार एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले एथलीट्स को एक करोड़ रुपए दिए। इसके अलावा, सिल्वर मेडलिस्ट को 75 लाख जबकि ब्रॉन्ज मेडलिस्ट को 50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी गई। इससे पहले गोल्ड मेडल विजेताओं को 20 लाख रुपए, सिल्वर मेडलिस्ट को 14 लाख रुपए और ब्रॉन्ज मेडलिस्ट को 10 लाख रुपए दिए जाते थे।

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