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इंद्रधनुषी झंडे से ये है समलैंगिकता का कनेक्शन?

गुरुवार को सुप्रीम न्यायालय ने समलैंगिकता को क्राइम ना बताकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है जिसके बाद देशभर में ख़ुशी का माहौल छाया हुआ था बीते कई वर्षों से समलैंगिकता को लेकर विरोध हो रहे थे जिसके बाद LGBT समुदाय के हित में निर्णय आने से हर कही खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी इस समुदाय के लोग अपनी ख़ुशी को जाहिर करने के लिए सडकों पर उतर आए थे  खूब डांस भी कर रहे थे सोशल मीडिया पर भी इंद्रधनुषी रंग का झंडा ही वायरल हो रहा है आम जनता से लेकर बॉलीवुड सेलेब्स तक भी सभी लोग इंद्रधनुषी रंग के झंडे को शेयर कर LGBT समुदाय को बधाई दे रहे हैं
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सभी तस्वीरों में आपको एक ही कॉमन झंडा नजर आ रहा होगा लेकिन शायद इस झंडे को देखकर आपके भी मन में ये सवाल तो आया ही होगा कि LGBT समुदाय के हाथों में हमेशा ये रंग-बिरंगा इंद्रधनुषी झंडा ही क्यों रहता है?  आखिर क्यों इस समुदाय के लोगों के कपड़े उनके हाथ, चेहरे पर भी इंद्रधनुषी झंडे ही छपे होते है? तो चलिए हम आपको इन सभी सवालों के जवाब दे ही देते हैं

क्या है इंद्रधनुषी झंडे का इतिहास-

इंद्रधनुषी झंडे को समलैंगिकता का प्रतीक माना जाता है अमेरिका के रहने वाले गे अधिकारों के एक्टिविस्ट गिलबर्ट बेकर ने वर्ष 1978 में इस इंद्रधनुषी झंडे का निर्माण किया था उस समय समलैंगिक समुदाय के नेता हार्वे मिल्क थे  उन्होंने ने ही गिलबर्ट को यह प्रतिक चिन्ह बनाने को बोला था गिलबर्ट को इंद्रधनुषी रंग के झंडे बनाने की प्रेणना कुदरत से मिली थीदरअसल उनका ऐसा मानना था कि जब प्रकृति खुद ही अपने आसमान में इस रंग का झंडा फहराती है तो फिर क्यों ना किसी का प्रतिक चिन्ह ही बना दिया जाए इसके बाद गिलबर्ट अलग-अलग रंग की पट्टियों को एक जोड़ते गए  ये झंडा बनकर तैयार हो गया उनका मानना था कि ये रंग-बिरंगा झंडा एक साथ सभी समलैंगिक लोगों को सूत्र में पिरोएगा

शुरुआती दौर में तो गिलबर्ट ने इस झंडे में आठ रंगो को स्थान दी थी लेकिन फिर बाद में इसमें से दो रंगो को हटाकर 6 रंगो वाला झंडा बना दिया इस झंडे में गुलाबी, लाल, पीला हरा, केसरिया  फिरोजी रंग जैसे रंग शामिल हैं

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