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नीति आयोग ने राज्य सरकारों से शुरू की बातचीत

निजी क्षेत्र की संस्थाओं जैसे कॉरपोरेट संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों, किसान संघों, कृषक सहकारिताओं और स्वयं सहायता समूहों सहित अन्य को इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। किसानों की तमाम समस्याओं का इन क्लिनिकों के माध्यम से हल निकाला जा सकता है, साथ ही किसानों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को भी इसके माध्यम से एकीकृत किया जा सकता है।

निजी क्षेत्र की संस्थाओं जैसे कॉरपोरेट संगठनों, समुदाय आधारित संगठनों, किसान संघों, कृषक सहकारिताओं और स्वयं सहायता समूहों सहित अन्य को इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। किसानों की तमाम समस्याओं का इन क्लिनिकों के माध्यम से हल निकाला जा सकता है, साथ ही किसानों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को भी इसके माध्यम से एकीकृत किया जा सकता है।

पीपीपी मॉडल पर होगी व्यवस्था
परिषद का कहना है कि किराये पर उपकरण मुहैया कराने में आज देशभर में निजी क्षेत्र की कई कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। उसी तरह, कृषि क्लिनिक में भी विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर जानकारी नहीं होने की वजह से बड़े पैमाने पर हो रहे नुकसान से किसानों को निजात दिलाई जा सकती है। आईसीएआर के एक अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय को क्लिनिक से संबंधित सिफारिश भेजी गई है। माना जा रहा है कि नीति आयोग ने इस बारे में कुछ राज्य सरकारों से विचार-विमर्श भी किया है।

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