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अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन ने मीडिया की रिपोर्ट की करी आलोचना, कहा ये

फ्रांस ने शनिवार को कहा कि उद्योगपति अनिल अंबानी की फ्रांस स्थित कंपनी रिलायंस फ्लैग के 2008-2012 की अवधि के दौरान कर से संबंधित मसलों का समाधान पूरी तरह कानूनी और विनियामक तौर-तरीकों से किया गया है।

फ्रांस ने इस बात पर जोर दिया कि मसले के समाधान में किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं था।

भारत में फ्रांस के राजदूत अलेक्जेंडर जिगलर ने ट्वीट के जरिए कहा, ‘वर्ष 2008-2012 की अवधि से जुड़े कर संबंधी विवाद में फ्रांस के कर प्राधिकरणों और टेलीकॉम कंपनी रिलायंस फ्लैग के बीच वैश्विक समाधान किया गया।’

उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा, ‘यह समाधन पूरी तरह विधायी और विनियामक रूपरेखा के तहत किया गया, जोकि कर प्रशासन के समान्य कार्य को नियंत्रित करता है।’

फ्रांस के राजदूत का यह बयान मीडिया की एक रिपोर्ट के आलोक में आया है, जिसमें दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के फैसले की घोषणा करने के कुछ ही महीने बाद फ्रांस के प्राधिकरणों ने कंपनी के 14.37 करोड़ यूरों के कर्ज को माफ कर दिया।

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन ने मीडिया की रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि उसकी अनुषंगी कंपनी रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस एसएएस के वर्ष 2008 से जुड़े कर का मसला भारत सरकार द्वारा फ्रांस की कंपनी दसॉ से राफेल जेट विमान खरीदने के फैसले से काफी पहले का है।

कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘रिलायंस फ्लैग के कर का मसला 2008 से जुड़ा है जो करीब 10 साल पुराना है।’

बयान के अनुसार, ‘रिलायंस फ्लैग ने कहा कि कर मांग पूरी तरह अरक्षण्ीय और अवैध थी। रिलायंस समाधान में किसी भी प्रकार के पक्षपात या लाभ से इनकार करती है।’

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