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म्यानमार में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अभियान जारी, करने जा रही ये काम

म्यानमार का उत्तर पूर्वी भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अभियान जारी है।इसके तहत म्यानमार की सेना ने आज अपने इलाके से संचालित हो रहे एनएससीएन(के) केमुख्यालय पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया।

इसे नियंत्रण में लेने के बाद वहां सेना के जवान स्थायी तौर पर तैनात कर दिये गये हैं।म्यानमार की सेना को आधिकारिक तौर पर ततमादाव कहा जाता है।इसी की एक बड़ी टुकड़ी को वहां पर कब्जा लेने के लिए भेजा गया था।नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (खापलांग) समूह का मुख्यालय पर सेना ने धावा बोला।म्यानमार की सेना के वहां पहुंचने के बाद एनएससीएन (के) के हथियारबंद उग्रवादियों ने उनका विरोध नहीं किया।

वे अपने हथियारों के साथ चुपचाप पीछे हट गये।इस वजह से बिना एक भी गोली चलाये शांतिपूर्वक यह काम संपन्न हुआ।वैसे लोग मान रहे हैं कि इस कार्रवाई से अब भारत में शांति प्रक्रिया में बाधा अवश्य उत्पन्न हो सकती है।प्रतिबंधित संगठन की तरफ से भी यह कहा गया है कि जारी शांति वार्ता को कायम रखने के लिए ही उन्होंने सेना का वहां विरोध नहीं किया है।

इस संगठन के सेंट्रल एक्जिक्यूटिव कमेटी के सदस्य यू क्याव वेन सेइन ने कहा किम्यानमार की सेना के करीब चार सौ जवान उनके मुख्यालय पर पहुंचे थे।जहां यह अभियान चलाया गया वह उत्तर पश्चिमी म्यानमार की सीमा पर स्थितहाकमाती जिला का इलाका है।जिल गांव के अंदर यह कार्रवाई हुई है उस गांव का नाम टागा है, जिसके पास नाईयून शहर है।

वैसे प्रतिबंधित संगठन के प्रवक्ता ने स्पष्ट कर दिया है कि हथियार और गोलाबारूद दोनों ही तरफ थे।लेकिन कार्रवाई से शांति वार्ता में बाधा पड़ सकती थी,इसे समझते हुए ही छापामारों ने पीछे हटने का फैसला किया है।वैसे वहां सेना का कब्जा होने के बाद भी इस संगठन के वैसे सदस्य अब भी मौजूद हैं,जो हथियारबंद नहीं हैं।

इनमें से कुछ लोग शांति वार्ता में भाग भी ले रहे हैं।दूसरी तरफ इस अभियान के बारे में म्यानमार की सेना ने कोई जानकारी देने से साफ इंकार कर दिया।उनसे जब इस कार्रवाई के बारे में पूछा गया था तो उनका जबाव था कि सेना अपनी कार्रवाई करती रहती है।जब जरूरत समझी जाएगी, प्रेस को भी इस बारे में बता दिया जाएगा।सेना की कार्रवाई के बारे में हर कुछ प्रेस को बताना कोई जरूरी नहीं है।

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