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सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए में भी उभर रहे मतभेद

लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे से अपमानित महसूस कर रही समाजवादी पार्टी ने जहां खुद को जनता परिवार से अलग कर लिया है। वहीं एनडीए के घटक दलों में भी सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद उभर रहे हैं। इन दलों को भाजपा से अधिक नहीं तो बहुत कम सीटें भी मंजूर नही हैं और भाजपा पर दबाव बनाने के लिए इन दलों ने अपनी चालें भी चलनी शुरू कर दी हैं।
ओवैसी से हाथ मिलाकर खड़ी की चुनौती 
राजद से निष्कासित सांसद व जन अधिकारी पार्टी के प्रमुख राजेष रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एआइएमआइएम प्रमुख मो ओवैसी से हाथ मिलाकर एनडीए के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। बताया जा रहा है कि सीमांचल की 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके ओवैसी के साथ पप्पू भी अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी मे हैं। खास बात यह है कि इन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है। ऐसे में पप्पू यादव का ओवैसी के साथ इन सीटों पर चुनाव लड़ना एनडीए की राह में मुष्किलें खड़ी कर सकती है।
कोई विकल्प तलाष रहा तो किसी को बागियों से परहेज 
पप्पू यादव की तरह ही अन्य दल भी भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे की स्थिति साफ करने के लिए दबाव की राजनीति कर रहे हैं। लोक जनषक्ति पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है तो राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने भाजपा को 100 सीटों तक ही सीमित रहने का इषारा किया है। वहीं लोजपा की उनके बगावती नेताओं को भाजपा से दूर रखने की कोषिष भी है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी अपनी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा पार्टी (सेकुलर) के लिए भी ज्यादा से ज्यादा सीटें चाहती है।
 
एनडीए पर उल्टे पड़ रहे उसके हमले 
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर माहौल गरम है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक दूसरे पर राजनीतिक प्रहार जारी हैं। एनडीए, राजदकाल में जंगलराज का तोहमत मढ़कर महागठबंधन पर हमला कर रहा है तो एनडीए के कुछ हमले उसी पर उल्टे पड़ रहे हैं। मसलन, भाजपा ने गांवों तक बिजली पहंुचाने के मुददे पर जब नीतीष सरकार को घेरा तो नीतीष ने केंद्र सरकार का ही आंकड़ा जनता के सामने कर दिया, जिसमें गांवों में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार राज्य पहले नम्बर है और अब उल्टे पड़े इस दांव पर भाजपा को जवाब देते नहीं बन रहा है।

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