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मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आगरा के निकट हिरनगांव में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और जेवर, ग्रेटर नोएडा में हवाई अड्डे की स्थापना के सम्बन्ध मै लिखा पत्र

स्टार एक्सप्रेस
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आगरा के निकट जनपद फिरोजाबाद के हिरनगांव में अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और ग्रेटर नोएडा के जेवर नामक स्थान पर हवाई अड्डे की स्थापना से सम्बन्धित प्रकरणों का शीघ्रतापूर्वक समाधान करवाने का अनुरोध किया है, जिससे अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी आगरा में प्रति वर्ष लाखों की संख्या में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को सीधे अन्तर्राष्ट्रीय वायुसेवा की सुविधा मिल सके। अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में अवगत कराया है कि पर्यटन नगरी आगरा में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को अन्तर्राष्ट्रीय वायु सेवा उपलब्ध कराने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आगरा में हवाई अड्डे की स्थापना प्रस्तावित है। इसके लिए आगरा के निकट जनपद फिरोजाबाद में हिरनगांव स्थल का चयन भी किया जा चुका है।
हिरनगांव स्थल पर केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय द्वारा कतिपय आपत्तियां उठायी गयी थीं। इन आपत्तियों के सम्बन्ध में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा परीक्षण करते हुए यह सुझाव दिया गया कि इस परियोजना के तहत यदि आगरा में एयरफोर्स के वर्तमान खेरिया एयरपोर्ट के समानान्तर रन-वे बनाया जाए तो रक्षा मंत्रालय की आपत्ति का निराकरण हो सकता है। किन्तु रक्षा मंत्रालय द्वारा इस वैकल्पिक सुझाव पर भी आपत्ति की गयी। इन आपत्तियों में एक आपत्ति यह भी है कि स्वारा में एरोस्टेट यूनिट की स्थापना के लिए प्रस्तावित भूमि हवाई अड्डे हेतु प्रस्तावित भूमि के निकट है।
इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि एरोस्टेट यूनिट अभी तक स्थापित नहीं हुई है और इसके लिए अभी तक भूमि का अधिग्रहण भी नहीं हुआ है। इन तथ्यों के आलोक में मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री से प्रकरण के समाधान हेतु रक्षा मंत्रालय को समुचित निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। केन्द्रीय रक्षा मंत्री ने 26 मई, 2015 के पत्र द्वारा हिरनगांव साइट पर रक्षा मंत्रालय की आपत्ति को उचित बताते हुए आगरा में मौजूदा एयरपोर्ट पर सिविल इन्क्लेव का विकल्प सुझाया गया है। यादव ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि रक्षा मंत्रालय की आपत्ति के मद्देनजर उनके द्वारा प्रधानमंत्री को प्रेषित 7 जुलाई,2015 के अपने एक अन्य पत्र द्वारा विकल्प के रूप में अन्य दो साइट, जनपद इटावा का सैफई एयरपोर्ट तथा जनपद आगरा की तहसील बाह के भदरौली नामक स्थान का प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें यह अनुरोध किया गया था कि इन प्रस्तावों का परीक्षण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय एवं नागरिक उड्डयन मंत्रालय से संयुक्त रूप से करा लिया जाए और उपयुक्त साइट के बारे में राज्य सरकार को सूचित किया जाए।
इस पत्र के उत्तर में केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री ने 01 अक्टूबर, 2015 के पत्र द्वारा यह अवगत कराया कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ग्रीन फील्ड हवाई अड्डे की स्थापना के लिए प्रस्तावित स्थलों का एक पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन (प्री-फीजिबिलिटी स्टडी) कराता है जिसके लिए कतिपय सूचनाएं तथा परामर्श प्रभार 11 लाख 66 हजार 105 रुपये आवेदक द्वारा जमा किया जाना होता है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को यह भी अवगत कराया है कि प्रस्तावित स्थल का पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, राज्य सरकार के अधिकारियों तथा कन्सल्टेन्ट की संयुक्त टीम द्वारा पहले ही किया जा चुका है। जिससे स्पष्ट है कि भारत सरकार के सम्बन्धित मंत्रालयों द्वारा प्रकरण में तत्परता बरते जाने से राज्य सरकार की इस परियोजना का शीघ्रतापूर्वक क्रियान्वयन हो सकेगा और आगरा के निकट हवाई अड्डे की स्थापना से अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन नगरी में प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में आने वाले देशी एवं विदेशी पर्यटकों को सीधे आगरा में अन्तर्राष्ट्रीय वायुसेवा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। यादव ने यह भी उल्लेख किया है कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में ग्रेटर नोएडा में जेवर नामक स्थान पर सार्वजनिक-निजी सहभागिता के आधार पर एक अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाये जाने का प्रस्ताव किया गया था जिसके लिए सभी आवश्यक क्लीयरेन्सेज़ भी प्राप्त हो गई थीं। इस सम्बन्ध में मुख्य सचिव द्वारा केन्द्रीय नागर विमानन सचिव को लिखे गये 10 जून, 2010 के अर्धशासकीय पत्र में सम्पूर्ण स्थिति का विस्तार से वर्णन है। राज्य सरकार इस परियोजना के अनुसार जेवर में भी एक उच्च स्तरीय हवाई अड्डा बनाना चाहती है!

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