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हुक्के की जगह अब ले रहें है छिपकली का नशा

प्रदेश में सामाजिक प्रतिष्ठा की शान माने जाने वाले हुक्के की जगह अब म्याऊं-म्याऊं (चीन से आ रहा), स्नेक बाइट व छिपकली का नशा युवा वर्ग पर हावी है। इसकी लत युवाओं में लगातार बढ़ती जा रही है। पीजीआईएमएस के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के पास अभी इस प्रकार का नशा करने वाले युवाओं का सही आंकड़ा तो नहीं, लेकिन जितने केस सामने आए हैं वह समाज के लिए खतरे की घंटी हैं।

पीजीआईएमएस के नशा मुक्ति केंद्र में पिछले छह सालों के दौरान जो तस्वीरें सामने आई हैं, वह काफी डराने वाली हैं। नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए यहां हर साल मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। प्रदेश में शराब, सिगरेट, बीड़ी-हुक्का जैसा नशा तो बहुत पीछे छूट गया है। युवा हेरोइन, स्मैक, चरस, गांजा जैसी नशीली चीजों का प्रयोग कर ही रहे थे कि अब म्याऊं-म्याऊं, स्नेक बाइट व छिपकली का नशा आम हो रहा है। काउंसिलिंग के दौरान बातचीत में सामने आया है कि यह नशा अन्य नशों से सस्ता है। जबकि डॉक्टर इसे जीवन के लिए अत्यधिक घातक मानते हैं। इसका प्रयोग करने वाले को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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