Breaking News

गुमनामी बाबा थे ये नेता प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धाजंलि

23 जनवरी 1897 को कटक (वर्तमान में ओडिशा) में एक बंगाली परिवार में हुआ था बता दें कि आजादी से पहले कटक बंगाल प्रांत का भाग हुआ करता था जानकीनाथ बोस  प्रभावती देवी के 14 बच्चों में से 9वीं संतान सुभाषचंद्र बोस थे नेताजी के पिता का नाम कटक शहर के प्रख्यात एडवोकेट में शुमार हुआ करता था

‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा’
वर्ष 1934 में जब ब्रिटिश गवर्नमेंट ने नेताजी को हिंदुस्तान से निर्वासित किया तो वह यूरोप चले गए थे यूरोप में भी हिंदुस्तान को आजाद करवाने का उनका सपना टूटा नहीं यूरोप में रहकर नेताजी अपने साथियों  दोस्तों को खत लिखते रहे वह हर खत में ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का जिक्र अवश्य किया करते थे 21 अक्टूबर 1943 को अंग्रेजों के विरूद्ध लड़ाई लड़ने के लिए सुभाष चंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फ़ौज’ का गठन किया नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुंचे यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ दिया

प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धाजंलि
आज (23 जनवरी) को उनकी जयंती के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी उन्होंने लिखा- की बहादुरी हर इंडियन को गौरान्वित करती है उनकी जयंती के मौके पर आज हम उन्हें नमन करते हैं मोदी ने जिस वीडियो को शेयर किया है उसमें नेताजी के सम्बोधन शामिल हैं बता दें कि नेताजी ने आजाद हिंद फौज की स्थापना की थी इसमें शामिल नौजवान राष्ट्र की आजादी के लिए मर-मिटने को तैयार थे

इस स्थान को बनाया अपनी कर्मभूमि
इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पता चलेगा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा  नागासाकी पर परमाणु हमला किया तो सारी संसार अमेरिका, ब्रिटेन  सोवियत संघ की ताकत के सामने झुकने पर मजबूर हो गई थी, लेकिन तब भी एक आदमी था जिसने अंग्रेजों के सामने झुकने से मना कर दिया  डट कर खड़ा रहा उस आदमी का नाम था सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजों के विरूद्ध युद्ध की आरंभ की  बर्मा का अपना मिलिट्री बेस बनाया बोस ने म्यांमार को अपनी कर्मभूमि बनाया था

एक वर्ष तक संभाला कांग्रेस पार्टी के पदभार
आजादी के ललक ने उन्हें लोगों के दिलों में एक नायक बना दिया था उनके भाषणों को सुनकर युवा वर्ग राष्ट्र को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने के लिए निकल पड़े सुभाष बाबू एक युवा नेता थे वर्ष 1938-39 तक उन्होंने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष का पदभार संभाला था सुभाष बाबू की विचारधारा कांग्रेस से अलग थी, इसी कारण नेताजी बाद में वे कांग्रेस पार्टी से अलग हो गए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *