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केंद्रीय सतर्कता आयोग जल्द ही गवर्नमेंट को लिखने वाला है ये लेटर

केंद्रीय सतर्कता आयोग जल्द ही गवर्नमेंट को एक लेटर लिखने वाला है जिसमें CBI के पूर्व प्रमुख रहे आलोक वर्मा के विरूद्ध CBI द्वारा विभागीय जांच  आपराधिक जांच करने की मांग की सिफारिश की जाएगी. सीवीसी के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, ‘यह हमारी प्रारंभिक जांच का तार्किक आधार है  हम आगे जो साफिरिश करेंगे वह उन आरोपों को लेकर होगी जिनका सामना वर्मा कर रहे हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों का कहना है कि सीवीसी की सिफारिश है कि वर्मा से मांस निर्यातक मोईन कुरैशी के मामले में जांच की जानी चाहिए. इसमें हैदराबाद के विवादित व्यापारी, दक्षिण की लोकल पार्टी से संबंध रखने वाले सांसद  कुछ दुबई बेस्ड लोगों फोन पर की गई वार्ता को खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ द्वारा पकड़ने का भी जिक्र है. सीवीसी ने अपनी 300 पन्नों की रिपोर्ट को सुप्रीम न्यायालय में जमा करवाया है जिसके आधार पर पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने वर्मा को CBI प्रमुख के पद से हटा दिया था.

रिपोर्ट में उस वार्ता का भी जिक्र है जिसमें दुबई बेस्ड लोग सना से कह रहे हैं कि उन्होंने उसे कुरैशी मामले में राहत दिलाने के लिए नंबर 1 से बात की है. सीवीसी ने सिफारिश की है कि करप्शन के आरोपों  CBI के मामलों को प्रभावित करने की जांच होनी चाहिए. इसी तरह यह भी देखा जाना चाहिए कि वर्मा ने भ्रष्ट अधिकारियों को CBI में लाने की प्रयास की थी.सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में विभिन्न डीएसपी, एसपी, डीआईजी  संयुक्त निदेशकों के साथ ही एजेंसी की विशेष यूनिट से ली गई नोटिंग का भी उल्लेख किया है. यह सभी बातें सीवीसी की जांच में सामने आए हैं.

इन बयानों  दस्तावेजों को वर्मा के साथ साझा किया गया था  जांच के समय रॉ के साथ वार्ता की गई थी. रॉ ने सना के चार फोन कॉल्स को रिकॉर्ड किया था. जिसमें उसे यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह 2-3 करोड़ रुपये देकर CBI मामले से छुटकारा पाना चाहता है. एक कॉल में दूसरी तरफ मौजूद शख्स इस बात का भरोसा दिलाता है कि उसने CBI के नंबर एक ऑफिसर से बात की है. वह आगे कहता है कि सना को जल्द ही इस मामले से राहत मिल जाएगी.

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