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रेमंड ग्रुप के चेयरमैन ने अपने पिता को दिया ये ऑफर

अपने पिता के साथ इन दिनों टकराव का सामना कर रहे रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम सिंघानिया अपने पिता विजयपत सिंघानिया के साथ सभी मसलों पर बैठकर बात करना चाहते हैं. उन्होंने अपने पिता को अपने साथ रहने का भी ऑफर दिया है.

गौतम के मुताबिक परिवार द्वारा स्थापित कंपनियों में स्वामित्व बेटे या बेटी को नहीं मिलनी चाहिए बल्कि वारिस के काबिलियत पर संचालन दिया जाना चाहिए अन्यथा कंपनी को प्रोफेशनली चलाया जाना चाहिए. रेमंड के सीएमडी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बॉम्बे न्यायालय के निर्णय के कुछ दिनों बाद बात कर रहे थे. न्यायालय ने उनके पिता विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा ‘द इनकंप्लीट मैन’ (एक अधूरा आदमी) के विरूद्ध आदेश देने से इंकार कर दिया था.

बोला जाता है कि 2015 में विजयपत सिंघानिया ने कंपनी का स्वामित्व  अपने शेयर बेटे गौतम सिंघानिया  को सौंप दिए थे. विजयपत सिंघानिया के मुताबिक उन्हें कंपनी से अलग करने के साथ-साथ फ्लैट से भी हटा दिया गया था. गौतम ने बोला कि मैं तीन वर्ष तक अपने पिता के सम्मान के लिए चुप रहा. अब वो एक किताब लिख रहे हैं  इसमें ज्यादातर चीजें मेरे विरूद्ध ही होंगी. किताब में 95% उनकी कल्पना होगी.

साथ ही रेमंड के सीएमडी ने बोला कि अगर मेरे पिता को कोई समस्या है तो हम बैठकर सभी मसलों पर बात कर सकते हैं, किताब क्यों लिखना? अगर उन्हें कोई समस्या ना हो तो मैं बैठकर बात करने को तैयार हूं. उन्होंने बोला कि ईश्वर ने मुझे सबकुछ दिया है, मुझे किसी से कोई समस्या नहीं. मगर मुझे ऐसी चीजें करने को मत कहिये जो करना मेरे लिए संभव न हो. गौतम ने यह भी बोला कि मैं यह चाहूंगा कि ऐसी समस्या मेरे  मेरी बेटियों के बीच कभी न हो.

गौतम ने बोला कि वह उस आदमी के शुक्रगुजार रहेंगे जो उनके पिता को उनके साथ रहने को राजी कर सके. वह मेरे पिता हैं, 81 वर्ष के हो चुके हैं. अगर मैं उनका ख्याल नहीं रखूंगा तो कौन रखेगा?

भविष्य की योजनाओं पर बोलते हुए गौतम ने बोला कि मैं रेमंड को एक मॉडल कंपनी बनाना चाहता हूं. रेमंड परिवार द्वारा संचालित कंपनी है, मेरे बच्चे अभी छोटे हैं  मेरी जिम्मेदारी अपने शायरहोल्डर्स के प्रति है.

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