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ज्योतिष शास्त्र में शनि की अहम् भूमिका, ये 3 राशि वाले होंगे साढ़ेसाती और ढैया से प्रभावित

ज्योतिष शास्त्र में शनि की अहम् भूमिका है। नवग्रहों में शनि को न्यायाधिपति माना गया है। ज्योतिष फ़लकथन में शनि की स्थिति व दृष्टि बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। किसी भी जातक की जन्मपत्रिका का परीक्षण कर उसके भविष्य के बारे में संकेत करने के लिए जन्मपत्रिका में शनि के प्रभाव का आंकलन करना अति-आवश्यक है।

शनि स्वभाव से क्रूर व अलगाववादी ग्रह हैं। जब ये जन्मपत्रिका में किसी अशुभ भाव के स्वामी बनकर किसी शुभ भाव में स्थित होते हैं तब जातक के अशुभ फ़ल में अतीव वृद्धि कर देते हैं। शनि एक राशि में ढ़ाई वर्ष तक रहते हैं। ज्योतिष अनुसार शनि दु:ख के स्वामी भी है अत: शनि के शुभ होने पर व्यक्ति सुखी और अशुभ होने पर सदैव दु:खी व चिन्तित रहता है।

शुभ शनि अपनी साढ़ेसाती व ढैय्या में जातक को आशातीत लाभ प्रदान करते हैं वहीं अशुभ शनि अपनी साढ़ेसाती व ढैय्या में जातक को घोर व असहनीय कष्ट देते हैं। गोचर अनुसार शनि जिस राशि में स्थित होते हैं उसके साथ ही उस राशि से दूसरी और द्वादश राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव माना जाता है। वहीं शनि जिन राशियों से चतुर्थ व अष्टम राशिस्थ होते हैं वे शनि की ढैय्या के प्रभाव वाली राशियां मानी जाती हैं।

जानते हैं कि वर्ष 2019 में किन राशि वाले जातकों पर शनि की साढ़ेसाती रहेगी एवं किन राशि वाले जातकों पर शनि की ढैय्या का प्रभाव रहेगा-

वर्ष 2019 में शनि की ‘साढ़ेसाती’ से प्रभावित होने वाली राशियां-

– वर्ष 2019 में वृश्चिक, धनु, एवं मकर राशि वाले जातक वर्ष पर्यन्त शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित रहेंगे।

वर्ष 2019 में शनि की ‘ढैय्या’ से प्रभावित होने वाली राशियां-

– वर्ष 2019 में वृष एवं कन्या राशि वाले जातक वर्ष पर्यन्त शनि की ढैय्या से प्रभावित रहेंगे।

 

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