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गांधी जी समाजवाद के पैरोकार थे।- शिवपाल सिंह

लखनऊ,(स्टार एक्सप्रेस)
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने लखनऊ जीपीओ स्थित गांधी जी की प्रतिमा को माल्यार्पित कर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दी। महात्मा गांधी की विचारधारा पर कभी उस तरह से चर्चा नहीं हुई, जिस तरह से होनी चाहिए थी। आजादी के बाद गांधी के नाम पर काफी काम हुए, उनके नाम पर संस्थान बने, योजनायें बनीं, पार्कों और चैराहों के नाम बापू के नाम पर हुए, मूर्तियों यहां तक की मंदिर भी बनें, उनकी उनसे जुड़ी छोटी से छोटी से छोटी बात भी देश जानता है, लेकिन उनकी विचारधारा के बारे में कम लिखा व पढ़ा गया। श्री यादव ने जोर देकर कहा कि गांधी जी समाजवाद के प्रबल पैरोकार थे, उनसे उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री व प्रख्यात विद्वान आचार्य डा0 सम्पूर्णानन्द ने अपनी पुस्तक की भूमिका लिखने का आग्रह करते हुए उनकी विचारधारा पूछी। उन्होंने स्वयं को समाजवादी कहा। उनका समाजवाद अहिंसा, सत्य और सहकार पर आधारित था। राष्ट्रपिता अक्सर कहा करते थे कि न केवल भारत अपितु दुनिया के साथ दुःख दर्द का समाधान जिस रास्ते से हो सकता है, वह समाजवाद है। महात्मा गांधी के पश्चात गांधी के सिद्धान्तों को लोहिया जी ने आगे बढ़ाया। समाजवादी पार्टी के संविधान की धारा-2 में तो साफ-साफ लिखा है कि समाजवादी पार्टी गांधी व लोहिया के बताए मार्ग पर चलेगी। बापू छोटे लोगों, छोटे शहरों व गावों की आवाज थे, अब उनकी आवाज समाजवादी पार्टी है। आज हमारे दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की भी जयंती है, जो सादगी व ईमानदारी की प्रतिमा थे। बात आजादी की लड़ाई के समय की है, एक संस्था ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के घर खर्च के लिए 50 रूप्या देना प्रारम्भ किया। शास्त्री जी ने पत्नी ललिता शास्त्री से पूछा कि क्या 50 रूप्ए में घर का खर्च चल जाता है, उन्होंने कहा 40 में ही चल जाता है, 10 रूपए बचा लेती हूँं। शास्त्री जी ने तुरन्त संस्था को पत्र लिखकर मानदेय 50 की जगह 40 करने का आग्रह किया। बापू मानते थे कि सिद्धान्त के बिना राजनीति पाप है। आप बापू की तुलना कुछ लोग प्रधानमंत्री से कर रहे हैं, उन्हें साबरमती संत बता रहे हैं। पहले जिस विचारधारा के एक आदमी ने बापू की हत्या की थी, आज उसी विचारधारा के लोग गांधी के सिद्धान्त व आत्मा की हत्या करने पर आमदा हैं। हम लोग ऐसा नहीं होने देंगे। गांधी के देश में नफरत है साम्प्रदायिकता के लिए कोई जगह नहीं है।
उन्होंने उपस्थित गांधीवादियों से अपनी एक बुराई छोड़ने और एक अच्छाई को बढ़ावा देने की अपील की।

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