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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस मुद्दे पर अपने सुर किए नरम

साल के अंत तक राम जन्मभूमि मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश लाने की डेडलाइन गवर्नमेंट को देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस मुद्दे पर अपने सुर नरम कर लिए हैं. अब संघ परिवार के सदस्य कानून बनाने की स्थान न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करने पर जोर दे रहे हैं. संघ के वरिष्ठ ऑफिसर इंद्रेश कुमार ने शुक्रवार को बोला कि अभी हमने राम मंदिर निर्माण के लिए कोई टाइम टेबल तय नहीं किया है. पहले न्याय की प्रक्रिया तो तय हो जाए, टाइम टेबल भी तय हो जाएगा.

सुप्रीम न्यायालय को इस मामले की सुनवाई प्रारम्भ करने  निर्णय देने में देरी नहीं करनी चाहिए. इससे पहले संघ  विश्व हिंदू परिषद ने गवर्नमेंट के लिए 2018 के अंत तक की समय सीमा तय की थी जिससे पहले ही उसे अध्यादेश लाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना था. विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने 18 नवंबर को दिल्ली में आयोजित धर्म संसद के बाद यह चेतावनी दी थी.

यही नहीं, 25 नवंबर को राष्ट्र भर में आयोजित रैलियों के जरिए संघ के शीर्ष नेतृत्व ने भी मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग गवर्नमेंट से की थी. बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बोला था कि मंदिर निर्माण ‘किसी भी मूल्य पर होगा.’ वहीं, एक  बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा ने कानून बनाने के लिए राज्य सभा में प्राइवेट मेंबर बिल लाने की घोषणा की थी. लेकिन गवर्नमेंट ने अध्यादेश लाने या कानून बनाने से साफ मना कर दिया है. यही वजह है राकेश सिन्हा भी प्राइवेट मेंबर बिल नहीं ला रहे हैं.

वहीं, संघ के सुर भी बदल गए हैं. 27 दिसंबर को आंतरिक सुरक्षा पर आयोजित एक कांग्रेस पार्टी पर बात करते हुए इंद्रेश कुमार ने बोला कि मंदिर निर्माण पर अभी कुछ भी तय नहीं हुआ है. कुछ होते ही आपको बता देंगे. संघ  विहिप के शीर्ष नेतृत्व की डेडलाइन के बावजूद कानून बनाने पर गवर्नमेंट के मना पर पूछने पर उन्होंने बोला कि गवर्नमेंट अच्छा कह रही है  विहिप भी.

कदम पीछे खींचने की वजह 

पांच राज्यों में बीजेपी के विधान सभा चुनाव हारने की वजह का विश्लेषण करने पर संघ ने पाया कि राम मंदिर मुद्दा वोट पाने के लिए मुफीद नहीं है. 35 वर्ष से कम आयु के मतदाताओं ने 1990-92 वाला राम मंदिर आंदोलन नहीं देखा है. इसीलिए, उनके बीच इस मुद्दे का प्रभाव नहीं है.

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