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शिवम के क्रिकेटर बनने की कहानी, पिता को गंवानी पड़ गई थी फैक्ट्री

 गरीबी में पलकर शोहरत की उंचाइयां हासिल करने की कहानियां तो प्रेरणा देती ही हैं, पर शिवम के क्रिकेटर बनने की कहानी कुछ अलग है। शिवम की परवरिश तो संपन्न परिवार में हुई थी, पर उसे क्रिकेटर बनाने में लगे पिता के जुनून के चलते उन्हें अपनी फैक्ट्री गंवानी पड़ी। इसके बाद शुरू हुआ मुफलिसी का दौर पर शिवम के पिता ने हार नहीं मानी। आखिरकार पांच छक्के लगाने के बाद आईपीएल में पांच करोड़ी खिलाड़ी बने शिवम ने पिता के सपनों को पंख दे दिया। बता दें कि शिवम उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के मानिकपुर गांव के मूल निवासी हैं। शिवम के पिता राजेश दुबे पूर्व मंत्री व सांसद रमेश दुबे के छोटे भाई हैं।परिवार के लोगों ने शिवम के क्रिकेट खेलने को लेकर विरोध भी किया लेकिन शिवम के पिता नहीं माने। शिवम जब 7 साल का था तभी उसके पिता राजेश ने उसे क्रिकेटर बनाने की जिद पकड़ी और फिर मुड़कर नहीं देखा।

प्रारंभिक कोच पिता फिर पूर्व क्रिकेटर चंद्रकांत ने दी ट्रेनिंग

शिवम के पिता राजेश दुबे सात वर्ष की उम्र में शिवम को क्रिकेटर बनाने के लिए भदोही से मुंबई लेकर आए। मुंबई के अंधेरी स्थित दुबे बिल्डिंग कॉम्लेक्स में पिच बनाकर उसे क्रिकेट खेलने का अभ्यास करना शुरू कराया। उम्र बढ़ने के बाद शिवम को भी क्रिकेटर बनने का जुनून सवार हो गया और वह प्रारंभिक कोच के रूप में पिता से क्रिकेट के गुण सीखने लगा। शिवम के पिता मुंबई के पूर्व कोच चन्द्रकान्त पंडित के मार्ग निर्देशन में शिवम का अभ्यास कराते रहे। शिवम को क्रिकेटर बनाने में राजेश दुबे इतने लीन हो गए कि आठ वर्षों तक अपनी फैक्ट्री व व्यवसाय अपने घनिष्ठ मित्रों व सम्बन्धियों के भरोसे छोड़ दिया। इस दौरान परिस्थितियां विपरीत हुईं। उनका व्यवसाय संभालने वालों से उन्हें धोखा मिला और राजेश दुबे सदमे में आ गए। परिवार ने उन्हें संभाला। इस दौरान शिवम क्रिकेट से दूर हो गया।

चार वर्षों बाद पिता ने फिर उठाया बीड़ा

व्यवसाय में मिले धोखे से राजेश दुबे सदमे में चले गए। परिवार भी मुफलिसी के दौर में आ गया। लोगों ने ताने तक मारना शुरू कर दिया कि बेटे को क्रिकेटर बनाने चले थे पर समय ने फिर करवट बदला और चार वर्ष बाद राजेश ने शिवम को क्रिकेटर बनाने का बीड़ा उठा लिया। शिवम का काबिलियत को देखते हुए उसे मुंबई कप्तान अभिषेक नायर का सानिध्य मिला। शिवम को लगातार अच्छे प्रदर्शन का फल मिला और शिवम का चयन मुंबई की टीम में हो गया। इसके बाद शिवम का बल्ला और गेंद दोनों आग उगलने लगे। निचले क्रम पर बैटिंग करते हुए शिवम को जब भी मौका मिलता वह अपनी काबिलियत का लोहा मनवाता साथ ही टीम को भी मुश्किलों से उबारता। प्रवीण तांबे के एक ओवर में पांच छक्के लगाने के बाद हाल ही में बड़ौदा के खिलाफ एक ओवर में पांच छक्के लगाकर वह सुर्खियों में आ गया। महान क्रिकेटर उसके ऑल राउंडर प्रदर्शन की तारीफ करने लगे।

फिटनेस व पावर देख सभी पूछते क्या खिलाते हो

इसका इनाम उसे आईपीएल की निलामी में मिली। इसमें रायल चैलेंजर बैंगलूरु की टीम ने उसे पांच करोड़ की बोली में खरीद लिया। बड़ी बात कि पांच करोड़ में बिकने वाले शिवम ने अभी तक एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। शिवम की फिटनेस पर उसके पिता राजेश दुबे ने काफी मेहनत की। राजेश दुबे ने एक बातचीत में बताया कि मैच के दौरान वे शिवम को लेकर जहां भी जाते हैं, लोग सबसे ज्यादा यही सवाल पूछते हैं कि आप शिवम को क्या खिलाते हो?

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