लखनऊ में सोमवार को महापंचायत, इन मुद्दों पर जारी रहेगी लड़ाई : राकेश टिकैत

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद रविवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अभी सिर्फ एक मुद्दा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि किसानों पर दर्ज मुकदमे और आंदोलन के दौरान हुई उनकी मौत भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा लाए तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की थी, जिसे संसद के आगामी सत्र में संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए खत्म किया जाएगा। इन तीनों कानूनों को वापस लेने के अलावा किसानों की मुख्य मांग एमएसपी के लिए कानून बनाना भी रहा है। गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत ने कहा, मैं लखनऊ जा रहा हूं, 22 तारीख नवंबर को लखनऊ में महापंचायत है। कृषि कानून वापस हुए हैं। हमारे सारे मुद्दों में से केवल एक मुद्दा कम हुआ है, बाकी मुद्दे अभी बाकी है। किसानों पर दर्ज मुकदमें और जिन किसानों की मृत्यु हुई ये मुद्दे महत्वपूर्ण है।

टिकैत ने किसानों और अन्य लोगों से अपील की है कि वे 22 नवंबर को लखनऊ में आयोजित किसान महापंचायत में अधिक से अधिक संख्या में महापंचायत में शामिल हों। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई घटना के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 26 अक्टूबर को लखनऊ में एक किसान महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की थी, हालांकि बाद में इसे 22 नवंबर के लिए टाल दिया गया था। इस घटना में चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे।

उन्होंने रविवार को एक ट्वीट में कहा, सरकार द्वारा जिन कृषि सुधारों की बात की जा रही है। वह नकली और बनावटी है। इन सुधारों से किसानों की बदहाली रुकने वाली नहीं है। कृषि और किसान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाना सबसे बड़ा सुधार होगा।

 

उन्होंने आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के मुद्दे पर भी सरकार से अपील की है। आंदोलन को यह मुकाम 700 किसानों की शहीदी देकर मिला है। किसान न इस बात को भूलेगा और न ही हुकूमत को भूलने देगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद राकेश टिकैत ने शुक्रवार को कहा था कि संसद में विवादास्पद कानूनों को निरस्त करने के बाद ही, वे चल रहे कृषि विरोधी कानूनों के खिलाफ आंदोलन वापस लेंगे। टिकैत ने ट्वीट किया था, आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार, एमएसपी के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे।

तीनों कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा था, एमएसपी को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए, ऐसे सभी विषयों पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निर्णय लेने के लिए, एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे, किसान होंगे, कृषि वैज्ञानिक होंगे, कृषि अर्थशास्त्री होंगे।

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