जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर कसा तंज,कहा-हेडलाइनजीवी के पास नोटबंदी वाले फैसले को रद्द करने का कोई तरीका होता

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : पीएम मोदी के तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने के फैसले के बाद देशभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी को ‘हे़डलाइनजीवी’ कहते हुए संबोधित किया और कहा कि काश ‘हे़डलाइनजीवी’ के पास 8 नवंबर 2016 के फैसले को भी रद्द करने का कोई तरीका होता। इस साल की शुरुआत में संसद की कार्यवाही के दौरान पीएम मोदी ने विरोध करने वालों के लिए ‘आंदोलनजीवी’ शब्द का प्रयोग किया था।शुक्रवार को देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में कृषि कानूनों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जो 29 नवंबर से शुरू होने की संभावना है। छोटे किसानों को सशक्त और मजबूत करने के लिए कानून लाए गए थे लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार किसानों के एक वर्ग को सुधारों के लाभों के बारे में नहीं समझा सकी।

इस फैसले को उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव से पहले प्रदर्शन कर रहे किसानों की जीत और भाजपा के मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। इस पर देशभर के विभिन्न पार्टियों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। इसी कड़ी में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने ट्वीट करते हुए पीएम मोदी पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, पहले संसद में बुलडोज कानून। फिर अभूतपूर्व विरोध का सामना किया। उसके बाद उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव से पहले वास्तविकताओं का सामना करते हुए अंत में निरस्त किया। इसमें निश्चित ही किसानों की जीत हुई है। मैं हमारे किसानों के परिश्रम को सलाम करता हूं जिन्होंने आखिर तक हार नहीं मानी।

 

फिर इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए जयराम रमेश लिखते हैं, काश हेडलाइनजीवी के पास 8 नवंबर 2016 के फैसले को निरस्त करने का कोई तरीका होता। यह वास्तव में एक क्रूर चाल थी, जिसकी कीमत देश आज भी चुका रहा है।

करीब एक साल पहले किसानों के मुद्दे पर सरकार की ओर से पलटवार करते हुए पीएम मोदी ने संसद की कार्यवाही के दौरान प्रदर्शनकारियों को ‘आंदोलनजीवी’ कहा था। पीएम मोदी ने कहा था, हाल के दिनों में लोगों का एक नया वर्ग उभरा है जो सभी आंदोलनों और विरोधों में देखा जा सकता है। ये आंदोलन जीव हैं। राज्य मुझसे सहमत होंगे क्योंकि वे भी इसका सामना कर रहे हैं।

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