कृषि कानूनों की वापसी ऐलान पर किसानों मे खुशी और जश्न का महौल देखने को मिला

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : गुरु परब पर तीन नए विवादित कृषि कानूनों को रद्द किए जाने के ऐलान से किसानों में भारी खुशी और जश्न का माहौल है। बीते एक साल से दिल्ली के बॉर्डरों पर डटे किसान एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस कदम का स्वागत कर रहे हैं। इस दौरान सिंघु बॉर्डर पर सबद कीर्तन का भी आयोजन किया गया। हालांकि, अभी किसान आंदोलन स्थलों से लौटने को तैयार नहीं हैं। किसान एक साल से तीन कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक नया कानून बनाने की मांग कर रहे थे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के बाद किसानों ने शुक्रवार को गाजीपुर सीमा पर ‘किसान एकता जिंदाबाद’ के नारों के साथ जश्न मनाया। प्रधानमंत्री ने गुरु नानक जयंती के अवसर पर राष्ट्र के नाम संबोधन में तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा की और कहा कि इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से जुड़े मुद्दों पर एक समिति बनाने की भी घोषणा की।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि वह उचित संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेगा। किसान मोर्चा ने एक बयान जारी कर आज कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा इस निर्णय का स्वागत करता है और उचित संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से घोषणा के प्रभावी होने की प्रतीक्षा करेगा। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत में एक वर्ष से चल रहे किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत होगी। हालांकि, इस संघर्ष में करीब 700 किसान शहीद हुए हैं। लखीमपुर खीरी हत्याकांड समेत, इन टाली जा सकने वाली मौतों के लिए केंद्र सरकार की जिद जिम्मेदार है।

बयान में कहा गया कि संयुक्त किसान मोर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह भी याद दिलाना चाहता है कि किसानों का यह आंदोलन न केवल तीन काले कानूनों को निरस्त करने के लिए है, बल्कि सभी कृषि उत्पादों और सभी किसानों के लिए लाभकारी मूल्य की कानूनी गारंटी के लिए भी है। किसानों की यह अहम मांग अभी बाकी है। इसी तरह बिजली संशोधन विधेयक को भी वापस लिया जाना बाकी है। एसकेएम सभी घटनाक्रमों पर संज्ञान लेकर, जल्द ही अपनी बैठक करेगा और आगे के निर्णयों की घोषणा करेगा।

 

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