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धनाढ्य वर्ग के एक तबके को बताया ‘सड़े आलू’ जैसा :  सत्यपाल मलिक

जम्मू-कश्मीर के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने राष्ट्र के धनाढ्य वर्ग के एक तबके को ‘सड़े आलू’ जैसा बताया  बोला कि उनमें समाज के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं है  वे कोई धर्मार्थ काम नहीं करते मलिक अनेक बार कश्मीर के धनी नेताओं  नौकरशाहों के विरूद्ध मुखर हो चुके हैं वह राज्य के सैनिक वेल्फेयर सोसाइटी के एक प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे

राज्यपाल ने कहा, ‘‘इस राष्ट्र में जो धनाढ्य हैं उनका एक बड़ा वर्गकश्मीर में नेता  नौकरशाह सभी धनी हैंउनमें समाज के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं है वे एक रुपये का भी धर्मार्थ काम नहीं करते ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से उच्च वर्ग में कुछ हैं आप इसे बुरे तरीके से नहीं लें, मैं उन्हें इंसान नहीं ‘सड़े आलू’ के समान मानता हूं ’’

मलिक के कहा, ‘‘यूरोप में  अन्य राष्ट्रों में वे धर्मार्थ काम करते हैं माइक्रोसॉफ्ट के मालिक अपनी संपत्ति का 99 फीसदी धर्मार्थ कार्यों के लिए देते हैं ’’ उन्होंने बोला कि समाज उच्च वर्ग से नहीं बनता बल्कि किसानों ,कर्मचारियों, उद्योंगों में कार्य करने वाले लोगों  सशस्त्र बलों में कार्य करने वाले लोगों से बनता है उन्होंने कहा, ‘‘चलें हम अपने सशस्त्र बलों का मनोबल बढ़ाएं, उनकी मदद करें  उन्हें याद रखें ’’

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू
इस बीच जम्मू व कश्मीर में छह महीने का गवर्नर शासन पूरा होने के बाद बुधवार को मध्यरात्रि से राष्ट्रपति शासन लागू हो गया इससे केन्द्रीय कैबिनेट को आतंकवाद से ग्रस्त इस राज्य के बारे में तमाम नीतिगत निर्णय लेने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा महबूबा मुफ्ती नीत साझेदारी गवर्नमेंट से जून में बीजेपी की समर्थन वापसी के बाद जम्मू-मश्मीर में राजनीतिक संकट बना हुआ है राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वहां केन्द्रीय शासन लगाने की एक अधिघोषणा पर हस्ताक्षर कर दिए

जम्मू-कश्मीर में छह महीने का गवर्नर शासन पूरा होने के बाद बुधवार को मध्यरात्रि से राष्ट्रपति शासन लागू हो गया 

बुधवार को गजट में जारी अधिसूचना में बोला गया है कि राष्ट्रपति को गवर्नर सत्यपाल मलिक से एक रिपोर्ट मिली है  इस पर तथा दूसरी सूचना पर विचार कर वह ‘‘संतुष्ट’’ हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता है

उल्लेखनीय है कि पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने जम्मू व कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने वाली राज्य के गवर्नर सत्यपाल मलिक की रिपोर्ट पर सोमवार को निर्णय किया था संविधान के अनुच्छेद 74(1)(आई) के तहत पीएम के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को मदद करेगी  सलाह देगी

राष्ट्रपति शासन की अधिघोषणा के बाद संसद राज्य की विधायिका की शक्तियों का प्रयोग करेगी या उसके प्राधिकार के तहत इसका प्रयोग किया जाएगा जम्मू व कश्मीर का अलग संविधान है ऐसे मामलों में जम्मू व कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत वहां छह माह का गवर्नर शासन जरूरी है इसके तहत विधायिका की तमाम शक्तियां गवर्नर के पास होती हैं

गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी  नेशनल कान्फ्रेंस के समर्थन के आधार पर पीडीपी ने जम्मू व कश्मीर में गवर्नमेंट बनाने का दावा पेश किया था जिसके बाद गवर्नर ने 21 नवंबर को 87 सदस्यीय विधानसभा खत्म कर दी थी तत्कालीन विधानसभा में दो सदस्यों वाली सज्जाद लोन की पीपुल्स कान्फ्रेंस ने भी तब बीजेपी के 25 सदस्यों  अन्य 18 सदस्यों की मदद से गवर्नमेंट बनाने का दावा पेश किया था

बहरहाल गवर्नर ने यह कहते हुए विधानसभा खत्म कर दी कि इससे विधायकों की खरीद- फरोख्त होगी  स्थिर गवर्नमेंट नहीं बन पाएगी अगर राज्य में चुनावों की घोषणा नहीं की गई तो वहां राष्ट्रपति शासन अगले छह महीने तक चलेगा

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