जौनपुर में मां अन्नपूर्णा देवी की प्रतिमा का मंत्रोचार के बीच स्वागत

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल

संवाददाता डॉ कमलेश यादव / जौनपुरअन्नपूर्णा देवी की दुर्लभ मूर्ति की शोभायात्रा का वाराणसी जाते समय रविवार की रात्रि साढ़े 9 बजे जौनपुर की सीमा मुंगराबादशाहपुर में भव्य स्वागत किया गया। अयोध्या से चलकर जौनपुर की सीमा इटहरा मे प्रवेश करने पर राज्य मंत्री गिरीश चंद यादव, राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी, विधायक रमेश मिश्रा, पूर्व सांसद डा. केपी सिंह, जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह सहित हजारों की संख्या में भाजपाईयों ने स्वागत किया।

इसके बाद महिलाओं ने पुष्प वर्षा की। मोबाइल से वीडियो व फोटो खींचने वालों की भीड़ लगी रही। शोभा यात्रा इटहरा बार्डर से होते हुए शक्तिपीठ दौलतिया हनुमान मंदिर पर पहुंची। जहां पर क्षेत्र के 11 विद्वान पंडितों मंत्रोच्चारण के साथ 51 दीपों की आरती उतारकर माता अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति की आरती उतारी गई।

 

राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी व ब्लाक प्रमुख सत्येंद्र सिंह (फंटू) के नेतृत्व में मां अन्नपूर्णा की मूर्ति की आरती उतारी गयी। शोभायात्रा दौलतियां शक्तिपीठ हनुमान मंदिर से पुन: शुरु हुई और नगर के मुख्य मार्ग से जौनपुर के लिए चल दी। रास्ते में श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति की पूजा कर आशीर्वाद लिया। लोग घरों के ऊपर से पुष्पा वर्षा करते नजर आए।

 

मुंगरा बादशाहपुर के समूचे नगर में बने पांच स्वागत गेटों को फूलों तथा विद्युत झालरों से सजाया गया था। जगह- जगह श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं के रथ के आगे आगे सा कीर्तन करते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में एसडीएम ज्योति सिंह, सीओ अतर सिंह व थाना प्रभारी सदानंद राय ने जगह जगह सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते नजर आए।

इस अवसर पर, भाजपा नेत्री डॉ अंजना सिह जिला महामंत्री सुशील मिश्रा व सुनील तिवारी, बीडीओ सुरेंद्र बहादुर सिंह, चेयरमैन शिव गोविंदसाहू, शीतला प्रसाद मिश्र आदि लोग मौजूद रहे। उल्लेख्य है कि प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी की पहल पर मां अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति कनाडा सरकार ने भारत वापस भेजी है।

 

सदियों पहले ग़ायब हुई अन्नपूर्णा की मूर्ति काशी में एक बार फिर स्थापित होगी। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा खुद उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ 15 नवंबर को काशी में करेंगे। 11 नवंबर को मां अन्नपूर्णा देवी की मूर्ति दिल्ली से सुसज्जित वाहन से जुलूस के रूप में चली है। विभिन्न स्थानों पर रुकते हुए 14 नवम्बर को अयोध्या से चलकर सुल्तानपुर-प्रतापगढ़ होते हुए जौनपुर बार्डर पर पहुंची।

 

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