ओएमआर शीट पर परीक्षा कराने के यूपी बोर्ड के आदेश से स्कूल प्रधानाचार्यों की उड़ी नींद

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : कक्षा नौ की अर्द्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षा ओएमआर शीट पर कराए जाने के यूपी बोर्ड के फरमान से राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों की नींद उड़ी हुई है। शासनादेश के अनुसार छमाही और सालाना परीक्षा के लिए प्रति छात्र 25-25 रुपये फीस ली जाती है। प्रधानाचार्यों को इसी 25 रुपये में प्रश्नपत्र छपवाने से लेकर वर्णनात्मक प्रश्नों के लिए उत्तरपुस्तिका और बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए ओएमआर शीट तक का इंतजाम करना है।ऐसे में प्रधानाचार्यों ने ओएमआर शीट पर परीक्षा करवाने में असमर्थता जताई है। प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ब्रजेश शर्मा का कहना है कि नई व्यवस्था के लिए शासन को बजट भी उपलब्ध कराना चाहिए। प्रधानाचार्य पहले ही बोर्ड के ऑनलाइन कार्यों के लिए अपनी जेब से रुपये खर्च कर रहे हैं। उस पर ओएमआर का अतिरिक्त व्यय करना संभव नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत यूपी बोर्ड ने इसी सत्र से एमएमआर शीट पर परीक्षा कराने को अनिवार्य किया है।स्कूलों में हुई अर्द्धवार्षिक परीक्षा की मांगी सूचना: यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत ने स्कूलों से अर्द्धवार्षिक परीक्षा के संबंध में सूचना मांगी है। जिला विद्यालय निरीक्षकों को आठ नवंबर को भेजे पत्र में एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार कृत कार्यवाही और अन्य सूचना निर्धारित प्रारूप पर भेजने को कहा है। जिले में स्कूलों की संख्या, कितने स्कूलों ने नवंबर के तृतीय सप्ताह में होने वाली अर्द्धवार्षिक लिखित परीक्षा की समय सारिणी जारी की, कितने स्कूलों ने द्वितीय सप्ताह में होने वाली अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षा की समय सारिणी जारी करने की जानकारी मांगी गई है।

ओएमआर शीट पर कक्षा 9 की परीक्षा कराए जाने के संबंध में प्रधानाचार्यों के एक शिष्टमंडल ने यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल से मंगलवार की शाम मुलाकात की। शिष्टमंडल में शामिल सर्वार्य इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुरारजी त्रिपाठी ने बताया कि सचिव ने कहा है कि कक्षा 9 की परीक्षा में इस सत्र से प्रयोग किए जाने वाली ओएमआर शीट का नमूना जल्द ही बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओएमआर शीट यूपी बोर्ड नहीं उपलब्ध कराएगा प्रधानाचार्यो को ही इसकी व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए शासन की ओर से किसी तरह के अतिरिक्त शुल्क का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। सचिव ने यह भी बताया कि रजिस्ट्रेशन के लिए जमा होने वाले शुल्क में से 10 रुपये विद्यालय को लौटाने को लेकर शासन से पत्र व्यवहार चल रहा है। स्वीकृति मिलने पर प्रति छात्र 10 रुपये की दर से विद्यालयों को शुल्क प्राप्त हो सकेगा।

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