कौन थीं डॉक्टर कमल रणदिवे, जानिए इनके बारे मे

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल  : गूगल ने आज अपना डूडल (Google Doodle) इंडियन सेल बायोलॉजिस्ट डॉक्टर कमल रणदिवे (Dr. Kamal Ranadive) को समर्पित किया है। आज डॉ. रणदिवे की 104वीं जयंती है। उन्हें कैंसर जैसी बीमारी पर अभूतपूर्व रिसर्च व विज्ञान और शिक्षा के जरिए एक बेहतर समाज बनाने के लिए जाना जाता है। डॉ. रणदिवे पर ये डूडल भारत के ही आर्टिस्ट इब्राहिम रयिन्ताकथ (Ibrahim Rayintakath) ने बनाया है। जिसमें डॉ. रणदिवे एक माइक्रोस्कोप को देख रही हैं। कमल समरथ (Kamal Samarath), जिन्हें हम कमल रणदिवे के नाम से भी जानते हैं। उनका जन्म आज ही के दिन 8 नवंबर को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उनके पिता ने उन्हें हमेशा मेडिकल शिक्षा के लिए इन्सपायर किया, लेकिन डॉ. रणदिवे का मन जीव विज्ञान में लगा रहा। डॉ. रणदिवे के पिता दिनकर पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में बॉयोलॉजी के प्रोफेसर हुआ करते थे। वे चाहते थे कि उनकी सभी बेटियों को भी अच्छी शिक्षा मिले। डॉ. रणदिवे अपने पिता की उम्मीदों पर खरी उतरीं। डॉ. रणदिवे को पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

1949 में उन्होंने इंडियन कैंसर रिसर्च सेंटर (ICRC) में एक रिसर्चर के तौर पर काम करते हुए साइटोलॉजी (Cytology) डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में फेलोशिप के बाद मुंबई (तब बॉम्बे) लौट आईं। यहां आकर उन्होंने आईसीआरसी में देश के पहले टिशू कल्चर लैबोरेटरी की स्थापना की।

डॉक्टर रणदिवे आईसीआरसी की डायरेक्टर भी रही हैं। वे भारत के उन रिसर्चर्स में शामिल हैं, जिन्होंने स्तन कैंसर और आनुवंशिकता के बीच संबंध की बात की थी। इसके अलावा उन्होंने कैंसर और कुछ वायरस के बीच संबंधों की भी पहचान की थी।

1973 में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं का समर्थन देने के लिए डॉक्टर रणदिवे और उनके 11 सहयोगियों ने भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ (IWSA) की स्थापना की। इसके अलावा डॉक्टर रणदिवे ने विदेश में पढ़ने गए छात्रों व स्कॉलर्स से भारत लौटकर देश में अपने ज्ञान का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। डॉक्टर रणदिवे ने रिटायरमेंट के बाद महाराष्ट्र के ग्रामीण समुदायों के लिए भी काम किया।

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