शेयर बाजार मे बढ़ी सेटलमेंट की समयसीमा

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल  : मार्केट नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने T+1 (ट्रेड+1 दिन) सेटलमेंट साइकिल के लागू होने की समयसीमा को बढ़ा दिया है। यह सेटलमेंट साइकिल अब 25 फरवरी 2022 से लागू होगी। यह खबर शेयर बाजार और इसके निवेशकों के लिए अहम है। इससे पहले सेबी का यह नियम 1 जनवरी 2022 से लागू होना था।शुरुआत में इसमें शेयर बाजार में मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से नीचे के 100 शेयरों को चुना गया है। मार्च से इसमें 500-500 शेयर जोड़े जाएंगे। सितंबर में, जब सेबी ने यह नया नियम पेश किया था, तो उसने इसे स्टॉक एक्सचेंजेज के लिए वैकल्पिक रखा था और अनिवार्य नहीं किया था। लेकिन अब जब सेबी ने साफ कर दिया है कि इसमें शुरुआत में नीचे के 100 शेयरों को शामिल किया जाएगा। इससे एक्सचेंजेज के लिए इस नए नियम को 25 फरवरी से लागू करना अनिवार्य हो गया है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के कस्टोडियन यह मांग कर रहे थे कि इसकी समयसीमा को बढ़ाया जाए। उनका कहना था कि इतने कम समय में वे इस नियम को लागू नहीं कर पाएंगे। अमेरिका में भी जब इस नियम को लागू किया गया था, तो ज्यादा समय दिया गया था।

सेबी ने सितंबर में इस नियम में बदलाव का ऐलान किया था। अगर आसान शब्दों में आपको समझाएं, तो फिलहाल भारत में सभी इक्विटी/स्टॉक सेटलमेंट T+2 के आधार पर होता है. जब आप शेयर बेचते हैं, तो वो शेयर तुरंत ब्लॉक हो जाता है और राशि आपको T+2 डे (T+2 Day) को मिलती है. यहां से टी का मतलब ट्रेड होता है।

सेबी के नए सर्कुलर के मुताबिक, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज सभी शेयरधारकों के लिए किसी भी शेयर के लिए T+1 सेटलमेंट साइकिल चुन सकता है। सेटलमेंट साइकिल बदलने के लिए कम से कम एक महीना पहले नोटिस देना होगा। सेबी ने यह भी कहा है कि स्टॉक एक्सचेंज किसी भी शेयर के लिए अगर एकबार T+1 सेटलमेंट साइकल चुन लेगा उसे कम से कम 6 महीने तक जारी रखना होगा। अगर स्टॉक एक्सचेंज बीच में T+2 सेटलमेंट साइकिल चुनना चाहता है तो उसे एक महीना पहले नोटिस देना होगा।

सेबी ने यह साफ कर दिया है कि T+1 और T+2 में कोई फर्क नहीं किया जाएगा। यह स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाले सभी तरह के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। अगस्त 2021 की शुरुआत में सेबी ने एक्सपर्ट्स का एक पैनल बनाया था, जिसमें मौजूदा T+2 साइकिल की जगह T+1 साइकल लागू करने की प्रक्रिया की मुश्किलों पर रिपोर्ट पेश करनी थी। देश में अप्रैल 2003 से T+2 सेटलमेंट साइकिल चल रहा है। उससे पहले देश में T+3 सेटलमेंट साइकिल चल रहा था।

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