यूपी चुनाव से पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी मे सीएम योगी ने पेश किया राजनीतिक प्रस्ताव

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : क्या भाजपा में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का कद अब राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ गया है। रविवार को दिल्ली में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद ये बातें कही जा रही हैं। योगी आदित्यनाथ अकेले ऐसे राज्य के मुख्यमंत्री थे, जहां अगले साल चुनाव होने वाला है। गुजरात के भूपेंद्र पटेल, हिमाचल के जयराम ठाकुर, उत्तराखंड के पुष्कर धामी समेत अन्य सभी मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही मीटिंग में शामिल हुए थे। योगी आदित्यनाथ का दिल्ली आना और अहम प्रस्ताव को पेश करना अहम संदेश देता है। यही नहीं बैठक में भी वह अमित शाह, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं के साथ पहली कतार में बैठे थे।उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में ही चुनाव होने वाले हैं, जिसमें जीत हासिल करना भाजपा के लिए बेहद अहम होगा। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व दिए जाने से भाजपा ने संकेत दिया है कि यूपी और योगी उसके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव को सबसे अहम माना जाता है और इसे पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की ओर से ही पेश किया जाता रहा है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को यह मौका मिलने से पता चलता है कि उनका कद भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भी बढ़ रहा है। इस प्रस्ताव में पार्टी की भविष्य की राजनीतिक योजनाओं और विजन के बारे में जानकारी दी जाती है।

भाजपा की 2017 और 2018 में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने इन प्रस्तावों को पेश किया था। इस बार योगी आदित्यनाथ को मौका दिए जाने के सवाल पर निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘उनकी परफॉर्मेंस शानदार है और वह इसके लिए डिजर्व करते हैं। निर्मला ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य के मुखिया हैं। हर कोई जानता है कि उन्होंने कोरोना काल में किस तरह से काम किया था। चाहे वह प्रवासी मजदूरों की मदद की बात हो या फिर गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करने का मसला हो।

वित्त मंत्री ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सीनियर सांसद भी रहे हैं। ऐसे में उन्हें राजनीतिक प्रस्ताव पेश करने के लिए आमंत्रित क्यों नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश के चुनावों को भाजपा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां से लोकसभा की कुल 80 सीटें आती हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के कद में इजाफा करना भाजपा की रणनीति भी हो सकता है ताकि यूपी में उन्हें अहम चेहरे के तौर पर पेश किया जा सके। इससे नेतृत्व में स्पष्टता दिखेगी और मतदाताओं में इससे योगी की छवि और अधिक मजबूत होने की उम्मीद पार्टी को है।

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