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पाक की कारागार में छह वर्ष बंद रहने के बाद स्वदेश लौटे हामिद निहाल अंसारी

कहानी पूरी फिल्मी नहीं तो फिल्म से कम भी नहीं. कहानी है पाक की कारागार में छह वर्ष बंद रहने के बाद स्वदेश लौटे हामिद निहाल अंसारी की. हामिद की मंगलवार को वापसी हुई.हामिद की वापसी के दौरान उनकी मां  बाबा बाघा बॉर्डर पर उनके स्वागत को पहुंचे. मां बेटे निहाल के लिए चॉकलेट लेकर पहुंची क्योंकि उसे चॉकलेट बहुत पसंद है.  

सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर हुए इश्क में पागल हामिद 2012 में पाक पहुंच गए थे, जहां उन्हें इंडियन जासूस  बिना दस्तावेज के पाए जाने के आरोप में अरैस्ट कर लिया गया था.लेकिन हामिद को उस समय झटका लगा जब वह कारागार में भी पहुंच गए  वह जिनकी तलाश में सरहद पार गए थे वह भी नहीं मिलीं.

वैसे हामिद की रिहाई इतनी सरल भी नहीं थी. इन छह वर्षों में हामिद को जहां कारागार में एक-एक दिन काटना कठिन था वहीं उनकी रिहाई के लिए पाक में कई हाथ साथ हुए. उनमें से ही एक थी रख्संदा नाज.

वैसे तो हिंदुस्तान वापसी में हामिद की कई लोगों ने मदद की लेकिन इन लोगों में पाक की मानवाधिकारों की एडवोकेट रख्शंदा नाज ने अच्छा वैसे ही उनका ख्याल रखा जैसे एक मां रखती है. उनके खाने-पीने से लेकर उनसे हर सप्ताह कारागार में मिलने जाने तक रख्शंदा ने लगातार हामिद का ख्याल रखा.

हामिद के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही रख्शंदा बताती हैं कि वो हामिद के लिए कारागार में जो सामान ले जाती थीं, उससे वो उनके लिए खीर बनाकर रखते थे.

17 दिसंबर 2018 को समाचार आई की हामिद को कारागार से रिहा किया जा रहा है. कारागार में हामिद के जाने की तैयारी हो रही थी, इसी बीच वह हामिद से मिलने वहां आखिरी बार पहुंची. वह बताती हैं कि हामिद के बारे रीता मनचंदा से पता चला था जो हिंदुस्तान में एक समाजसेवी हैं. हालांकि पाकिस्तानी पत्रकार  समाजसेवी जीनत शहजादी ने इस केस के लिए न्यायालय में अपील की थी. हामिद की कस्टडी की सारी जानकारी उन्होंने ही जुटाई थी.

रख्शंदा ने इस केस पर बहुत मेहनत की

रख्शंदा बताती हैं कि मैं तीन वर्ष से पाक में नहीं थी, जब मैं आई तो जीनत शहजादी पाक में मिली नहीं बाद में वो दो वर्ष बाद मिल गई  अब अपने घर वालों के साथ रह रही हैं.

जीनत के बाद से ही मैं हामिद के साथ संपर्क में हूं. हामिद को पेशावर कारागार में पहली बार पेश किया गया  बताया गया कि उन्हें जासूसी के मामले में सजा मिली है. कई दिनों से बेटा गायब था,  परिवार ने मान लिया था कि वह उसे खो चुके हैं लेकिन जब उनके परिवार से बात हुई  उनकी मां को तब विश्वास हुआ कि उनका बेटा जिंदा है.

प्यार इश्क का कोई यह पहला मामला नहीं था. मैंने जब ये केस देखा तो मुझे ये मामला सच्चा लगा. ये मामला सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ था  मेरी बात हामिद के परिवार से भी हुई थी ये केस सीनियर वकील काजी मोहम्मद अनवर भी देख रहे थे  उन्होंने जिस तरह इस केस पर कार्य किया, उसकी वजह से ही यह कामयाबी मिली है.

रख्शंदा ने इस केस के लिए बहुत ज्यादा मेहनत की है. वह बताती हैं कि उन्होंने केस के कागज हामिद की अम्मी फौजिया अंसारी  रीता मनचंदा से मंगाए. हालांकि केस तो पहले ही फाइल हो ही चुका था लेकिन मैं भी इस कैसे में वैसे ही कार्य करना चाहती थी जैसे बाकी लोग कर रहे थे. बस मैंने इस पूरे मामले को अपना माना  हामिद को वापिस भेजना अपना उद्देश्य बना लिया.

इस कामयाबी का पहले श्रेय पत्रकार जीनत को जाता है, जिसने इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग की  इस केस की सारी जानकारी जुटाई. इसके बिना हामिद के बारे में किसी को नहीं पता चलता.

उस लड़की की हो चुकी है शादी

हामिद खाली हाथ ही हिंदुस्तान लौटे हैं.  जिस लड़की की तलाश में पाक आए थे, वो लड़की खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहाट की रहने वाली है  अब उसी विवाह हो चुकी है. जब हामिद कारागार में थे तब जीनत खुद उससे मिलने पहुंची थीं जीनत उनके पिचा  दोस्तों से भी मिली थीं.

रख्शंदा अंदर तक जुड़ चुकी हैं हामिद से

वैसे तो रख्शंदा ने अपने ज़िंदगी में कई केस लड़े हैं लेकिन यह मामला थोड़ा अलग था. पूरी कहानी सुनाते हुए उनकी आंखे कई बार नम हो जाती हैं. वह कहती हैं कि मुझे याद है कि जब मैं हामिद से मिली तो उसे विश्वास ही नहीं था कि वो यहां से कभी छूट पाएगा. मैंने उसे विश्वास दिलाया  बोला कि अब दिन गिनना प्रारम्भ कर दो.

रख्शंदा हामिद से जुड़ा हुआ महसूस करती थीं तो वह जब भी उससे मिलने कारागार जातीं तो उसके लिए कुछ न कुछ खाने को ले जाती थीं. लेकिन उन समानों से हामिद उनके लिए कई यादगार चीजें उपहार स्वरूप दीं. हामिद शाकाहारी है  वह खीर बहुत अच्छी बनाता है. वह मेरे लिए कई बार खीर बनाता था

वह रख्शंदा का रोज इंतजार करता था. कारागार में उसने हाथों से कई वस्तु बनाना सीखी. उसने मुझे माचिस की तिल्लियों से बना घर दिया. अपने हाथ से सजाया हुआ पर्स दिया. इन सबसे उसका प्यार झलकता था.

कई बार कारागार के ऑफिसर भी कहते कि हामिद आपका  आपकी उसकी पसंदीदा है.

हामिद 2012 में गए थे सरहद पार

नवंबर 2012 में प्यार में पागल हामिद सरहद पार चले गए थे. हामिद को छह वर्ष पेशावर कारागार में बिताने के बाद मंगलवार को रिहा किया गया. वह साढ़े पांच बजे अटारी सीमा पर अपनी मां, पिता निहाल अंसार  भाई से मिले. वहां मौजूद एक बीएसएफ ऑफिसर के मुताबिक, हामिद से मिलते ही मां यह देखने लगीं कि पाकिस्तान की कारागार में उसे कहीं प्रताड़ित तो नहीं किया गया. इस पर हामिद बोले मां सब अच्छा है.
आज तड़के जब हामिद दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने बोला कि मैं वतन वापस लौटकर इमोशनल हो रहा हूं.

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