मंहगाई का निकला गजट, आम आदमी का बिगड़ा बजट सब्जियों के भी बढ़े दाम

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : त्योहारों के इस सीजन में महंगाई की मार ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। पेट्रोल-डीजल से लेकर सब्जियों के रेट में तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, खाद्य तेल की कीमतों में जरूर गिरावट देखने को मिली। अब जब दिवाली और छठ पूजा नजदीक है ऐसे में आम आदमी को डरा सता रहा है कि कहीं बढ़ती महंगाई उनका बजट ना बिगाड़ दे।

महंगी होती सब्जियों ने बिगाड़ा कीचन का बजट – सरकार के प्रयासों के बाद टमाटर की कीमतों में नियंत्रण देखा जा रहा है। कुछ समय पहले 100 रुपये के करीब बिक रहा टमाटर अब खुदारा बाजार में 40 से 45 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। दिल्ली के कई खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 60 रुपए किलो है। वहीं, लौकी, गोभी, भींडी, शिमला मिर्च जैसी सब्जियां 50 रुपए किलो से ज्यादा के भाव बिक रही हैं। राष्ट्रीय राजधानी में टमाटर भी 50 रुपये प्रति किलोग्राम के पार बिक रहा है। पिछ्ले कुछ दिनों के दौरान आलू 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम महंगा हो गया है। इसकी बड़ी वजह है कोल्ड स्टोरेज से पुरानी आलू की निकासी में हो रही देरी है। साथ ही बेमौसम बारिश ने भी नई फसल को बुरी तरह से प्रभावित किया है।

 

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही वृद्धि भी कहीं ना कहीं सब्जियों के दाम को प्रभावित कर रहे हैं। अदरक इस समय 40 से 50 प्रति किलोग्राम बिक रहा है। बैंगन का रेट भी 30-35 रुपये तक पहुंच गया है। एक फूल गोभी 25 से 30 रुपये में मिल रही है।

 

बारिश ने किया किसानों को चौपट – बीते सप्ताह बारिश के कारण धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। अमूमन धान की फसल होने के बाद गांव के लोग बाजारों की रुख करते थे, लेकिन इस साल बारिश ने सब कुछ चौपट कर दिया है। गांव के किसान धान की फसल खराब होने से तंगी की हालत में है। जिसकी वजह से बाजार में उस तरह की रौनक भी नहीं दिखाई दे रही है।

खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट – दिवाली से पहले खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। सरकार के इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के बाद सोयाबीन सहित कई अन्य कुकिंग ऑयल की होलसेल कीमतों में 9 से 12 रुपये तक की गिरावट देखी गई है। इसके बावजूद भी पिछले साल की तुलना में कीमतों 30 से 40 रुपये का अंतर बना हुआ है। वहीं, सरसों के तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। उम्मीद की जा रही है कि फरवरी-मार्च में नई फसल आने के बाद इसमें भी कमी देखी जा सकेगी।

 

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