यूपी चुनाव 2022 से पहले राष्ट्रीय क्रांति पार्टी ने भी दिया सपा को समर्थन

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : राष्ट्रीय क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुँवर देवेंद्र सिंह लोधी ने अपने साथियों के साथ उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। देवेंद्र सिंह की अगुवाई मे पार्टी के कई नेताओं ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर इसकी घोषणा की। वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बस्ती से ब्लाक प्रमुख बहादुरपुर राम कुमार अपने सैकड़ों साथियों के साथ भाजपा छोड़कर सपा की सदस्यता ग्रहण करवाई।समाजवादी पार्टी की नीतियों व अखिलेश यादव के नेतृत्व में आस्था जताते हुए रायबरेली के भाजपा नेता व पूर्व विधायक शिव गणेश लोधी के पुत्र राहुल लोधी के साथ रामऔतार, अजय कुमार शुक्ल, उमाशंकर लोधी, राजेश कुमार त्रिपाठी साथियों सहित सपा में शामिल हुए। रायबरेली स्थित न्यू स्टैंर्डउ ग्रुप ऑफ स्कूल के प्रबंधक डा. शशिकांत शर्मा अपने समर्थकों डा. अरुण चौधरी, डा. एसके पांडेय, डा. नीरज सिंह, शीला सिंह, अजीत चौधरी कन्नौजिया, मो. असद, अमरजीत सिंह के साथ सपा में शामिल हुए। राहुल विश्वकर्मा सदस्य जिला पंचायत महराजगंज बसपा छोड़ शामिल हुए।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि यूपी में भाजपा सरकार किसानों को तबाह करने पर yx गई है। प्रदेश में जितनी उर्वरक की जरूरत है उतनी किसानों को नहीं मिल रही है। प्रदेश के तमाम जिलों में खाद को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, पर सरकार कान में तेल डाले है।

अखिलेश ने एक बयान में कहा कि किसान खाद के लिए मारा-मारा फिर रहा है। डबल इंजन सरकार खाद उपलब्ध नहीं करा रही है। भाजपा सरकार को किसान की जिंदगी से कुछ लेना देना नहीं है। खाद के लिए किसान घंटों नहीं, कई-कई दिन लाइन लगाने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल रहा है। बुंदेलखंड में तो खाद के कानून व्यवस्था का सवाल बन जाने का खतरा है। कोंच जालौन, ललितपुर, झांसी आदि जिलों में सहकारी समितियों में खाद न होने से किसान परेशान है। किसान रात से लाइन लगा रहे हैं। ललितपुर में खाद खरीदने के लिए दो दिन से बिना खाए-पिए लाइन में लगे किसान भोगी लाल की मौत हो गई। उसके परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए।

अखिलेश ने कहा कि किसान की पकी और खड़ी धान की फसल असमय बरसात से बर्बाद हो गई है। क्रय केंद्रों में खरीद न होने से किसान को अपनी फसल 1000-1100 रुपये प्रति कुंतल में बेचना पड़ रहा है। सरकार ने अभी न नुकसान का आकलन कराया है और न ही तत्काल मदद दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा वैसे भी पूंजी घरानों की संरक्षक पार्टी है। उसे अब लग रहा है कि बढ़ते जनाक्रोश के चलते उसकी सत्ता में दोबारा वापसी नहीं होने वाली है। इसलिए वह किसानों को पूरी तरह हाषिये पर रख रही है। प्रदेश के एक मंत्री को अपने खस्ताहाल विभाग को दुरूस्त करने की फिक्र नहीं, वे बस विपक्ष को ट्वीट कर गलत साबित करने में ही लगे रहते हैं। अच्छा हो बिन काम मंत्री के लिए एक ट्विटर टीका-टिप्पणी मंत्रालय दे दिया जाए।

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