गोरखपुर की घटना में CM योगी एक्शन में, दागियों पर सख्त कार्यवाही करने के दिये आदेश

स्टार एक्सप्रेस डिजिटल : सीएम योगी ने आदेश दिया है कि अति गंभीर अपराधों में लिप्त अधिकारियों/कार्मिकों की बर्खास्तगी की जाए और दागियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती न दी जाए। ऐसे लोगों की लिस्ट बनाकर जल्द से जल्द कार्रवाई शुरू की जाए।

 

गोरखपुर (Gorakhpur Police) के एक होटल में व्यापारी मनीष गुप्ता (Manish Gupta Murder) के साथ पुलिस बर्बरता और मौत के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Aditya Nath) ने सख्ती जाहिर की है। सीएम योगी ने गुरुवार को मनीष गुप्ता के परिवार से बातचीत की जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार करने के लिए पत्नी मीनाक्षी तैयार हो गयीं। सीएम ने सख्त रवैया अपनाते हुए ऐसे पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने के आदेश दिए हैं जो कि गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं या जिन पर गंभीर आरोप हैं। इसके आलावा अपराधों में आरोपी पुलिसकर्मियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती न दिए जाने के आदेश भी दिए हैं।

सीएम योगी ने आदेश दिया है कि हाल के दिनों में कई पुलिस अधिकारियों/कार्मिकों के अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने की शिकायतें मिली हैं, यह कतई स्वीकार्य नहीं है। पुलिस विभाग में ऐसे लोगों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। प्रमाण पत्रों के साथ ऐसे लोगों की एक लिस्ट तैयार कर उपलब्ध कराई जाए। इन सभी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अति गंभीर अपराधों में लिप्त अधिकारियों/कार्मिकों की बर्खास्तगी की जाए और दागियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती न दी जाए।

गुरुवार को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी कानपुर में पीड़ित परिवार से मिलने के लिए पहुंचे। परिवार से मुलाक़ात के बाद उन्होंने सरकार से मामले की जांच हाइकोर्ट के सिटिंग जज से कराने की मांग की है। अखिलेश ने कहा कि जब तक बीजेपी की सरकार रहेगी ऐसे मामलों का सच सामने नहीं आ पाएगा। पुलिस गलत काम कर रही है और सरकार उसे रोक नहीं पा रही है। इसी के साथ अखिलेश ने सपा की तरफ से परिवार को 20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है और सरकार से 2 करोड़ रुपए की सहायता देने की मांग की है। सपा ने मांग की है कि परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए।

 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर कहा- यूपी सीएम के गृह जनपद गोरखपुर की पुलिस द्वारा तीन व्यापारियों के साथ होटल में बर्बरता व उसमें से एक की मौत के प्रथम दृष्टया दोषी पुलिसवालों को बचाने के लिए मामले को दबाने का प्रयास घोर अनुचित है। घटना की गंभीरता व परिवार की व्यथा को देखते हुए मामले की सीबीआई जांच जरूरी है। आरोपी पुलिसवालों के विरूद्ध पहले हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं करना, किन्तु फिर जन आक्रोश के कारण मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं करना सरकार की नीति व नीयत दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सरकार पीड़िता को न्याय, उचित आर्थिक मदद व सरकारी नौकरी दे।

 

बता दें कि मनीष गुप्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की झूठी कहानी की पोल खोलकर रख दी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि मनीष के सिर, चेहरे और शरीर पर गंभीर चोट के निशान हैं। मनीष के सिर के अगले हिस्से पर तेज प्रहार किया गया, जिससे उनकी नाक के पास से खून बह रहा था। हालांकि, पुलिस ने घटना के बाद अपने पहले बयान में इसे हादसे में हुई मौत बताया था।

 

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