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अब वैज्ञानिकों ने सभी पुरुषों के लिए विकसित कर दिया बर्थ कंट्रोल जेल

महिलाओं के लिए यूं तो बाजार में बहुत तरीके की गर्भनिरोधक गोलियां मौजूद होती हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने सभी पुरुषों के लिए भी बर्थ कंट्रोल जेल विकसित कर दिया है। पुरुषों के बना यह पहला कॉन्ट्रासेप्शन जेल होगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, चाइल्ड हेल्थ और ह्यूमन डेवलपमेंट और पॉपुलेशन काउंसिल के शोधकर्ताओं ने साथ में यह कॉन्ट्रासेप्श जेल विकसित किया है। जो कि पुरुषों में स्पर्म के प्रोडक्शन को कम करने में सहायता करेगा।

इस स्टडी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ‘इस जेल में पुरुषों में पाया जाने वाला टेस्टोस्टेरोन हार्मोन और फीमेल सेक्स हार्मोन प्रोजेस्टेरोन का सिंथेटिक वर्जन मौजूद है। पुरुषों को इस जेल को अपनी कमर और कंधे पर लगाना होगा। जिसके बाद इस जेल में मौजूद हार्मोन्स को स्किन एब्सोर्ब कर लेगी और पुरुषों में स्पर्म के प्रोडक्शन को कम कर देगी।’ वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, पुरुषों में इस जेल को लगाने के कारण स्पर्म की मात्रा कम हो जाएगी, मगर इस जेल का असर अधिक समय तक नहीं रहेगा।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की कॉन्ट्रासेप्टिव डेवलपमेंट प्रोग्राम की प्रमुख लेखक Diana Blithe ने कहा है कि कई सारी महिलाएं हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्शन को यूज नहीं कर पाती हैं। वहीं, बाजार में पुरुषों के लिए कई लिमिटेड कॉन्ट्रासेप्टिव होती हैं। उन्होंने आगे कहा है कि ‘एक सुरक्षित, असरदार और रिवर्सिबल मेल कॉन्ट्रासेप्टिव लोगों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।’

जानकारी दे दें कि जल्द ही यूएस में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा इस जेल का क्लीनिकल ट्रायल किया जाएगा। जिसमें इस जेल का टेस्ट लगभग 400 कपल्स पर किया जाएगा। जिसके बाद इस ट्रायल से इस बात का पता चल जाएगा कि ये जेल कितना असरदार और सुरक्षित है। साथ ही इस जेल का एक वक्त में कितना इस्तेमाल करने से फायदा रहेगा।

इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. विलियम ब्रेमनर ने बताया है कि ‘इस नए जेल में बेहद क्षमता है, ये काफी असरदार साबित हो सकता है। पुरुषों के पास बर्थ कंट्रोल के लिए अभी तक सिर्फ कंडोम का ही ऑप्शन था। क्योंकि कॉन्ट्रासेप्शन के सभी ऑप्शन महिलाओं के लिए थे। लेकिन अब इस जेल की सहायता से पुरुष भी बिना किसी कंडोम यूज के बर्थ कंट्रोल कर पाएंगे। Wolverhampton University के शोधकर्ताओं ने साल 2016 में जानकारी दी थी कि स्पर्म स्विमिंग को रोकने का तरीका उन्होंने विकसित कर लिया है।

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